रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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हिमाचल प्रदेश: CAG रिपोर्ट पर सरकार को घेरते हुए जयराम ठाकुर ने वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को सुखविंदर…

हिमाचल प्रदेश: CAG रिपोर्ट पर सरकार को घेरते हुए जयराम ठाकुर ने वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए
(फोटो: IANS)

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को सुखविंदर सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट ने बड़े पैमाने पर वित्तीय कुप्रबंधन और अनियमितताओं को उजागर किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ठाकुर ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए राज्य के खजाने को राजस्व हानि होने का दावा किया है।

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एक बयान जारी कर भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि सरकार ऑनलाइन टेंडरिंग, खरीद में पारदर्शिता और टैक्स कलेक्शन जैसे हर मोर्चे पर नाकाम रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन विफलताओं के कारणों पर राज्य की जनता को स्पष्टीकरण देने की मांग की। ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुँचाने वाले प्रतीत होते हैं, भले ही इससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा हो।

बजटीय प्रावधानों और खर्च में गड़बड़ी

जयराम ठाकुर ने प्रदेश के बढ़ते राजस्व और राजकोषीय घाटे पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी बजटीय आवंटन के लगभग 438 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसके विपरीत, योजनाओं के लिए 673 करोड़ रुपये का प्रावधान होने के बावजूद उस पर कोई वास्तविक खर्च नहीं किया गया। उनके अनुसार, ये तथ्य वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाते हैं।

ई-प्रोक्योरमेंट पर उठाए सवाल

ठाकुर ने कहा कि CAG रिपोर्ट में सबसे गंभीर अनियमितताएं सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम के माध्यम से की गई खरीद और टेंडरिंग में पाई गईं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही वह 'व्यवस्था परिवर्तन' है, जिसका वादा सुक्खू सरकार ने किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक विशेष समूह को निविदाओं में भाग लेने और ठेके हासिल करने के लिए विभागीय संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति दी जा रही थी।

नियुक्तियों पर भी सरकार को घेरा

सरकारी नियुक्तियों के मुद्दे पर, ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण नियुक्ति को रद्द करने और उसकी जगह एक योग्य उम्मीदवार को नियुक्त करने के आदेश का स्वागत किया, और कहा कि इस कदम ने सरकार के मनमाने कामकाज पर रोक लगाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर अपने साथियों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के कई फैसले निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ठाकुर ने मुख्यमंत्री को तानाशाही रवैया छोड़कर संविधान के दायरे में काम करने की सलाह दी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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