बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रेल नेटवर्क का विस्तार: केंद्र सरकार ने 9,450 करोड़ रुपये की 4 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश के रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बुधवार को हुई इस बैठक में चार…

रेल नेटवर्क का विस्तार: केंद्र सरकार ने 9,450 करोड़ रुपये की 4 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी हरी झंडी
(फोटो: IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश के रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बुधवार को हुई इस बैठक में चार राज्यों में रेलवे की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन चार रेल परियोजनाओं पर कुल अनुमानित लागत लगभग 9,450 करोड़ रुपये आएगी और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल परिवहन क्षमता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, बल्कि विभिन्न राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

परियोजनाओं का विवरण और लागत

स्वीकृत की गईं ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। इनके पूरा होने पर भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी, जिससे व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों का संचालन सुगम होगा।

विभिन्न परियोजनाओं का ब्यौरा इस प्रकार है:

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन (173 किमी): इस पर लगभग 3,352 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • कटक-पारादीप तीसरी एवं चौथी लाइन: इसके लिए 2,286 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: इस पर 2,229 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: इसके लिए 1,583 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

इसके अतिरिक्त, सीसीईए ने बिहार में एक चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को भी मंजूरी दी है, जिसके साथ कुल पाँच इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत 13,041 करोड़ रुपये हो जाती है।

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर प्रभाव

ये परियोजनाएं पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जाएंगी, जिसका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा देना है। इन रेल मार्गों पर कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसे प्रमुख सामानों की ढुलाई होती है। सरकार को उम्मीद है कि क्षमता विस्तार से प्रति वर्ष लगभग 76 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई हो सकेगी।

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से भीड़भाड़ कम होगी, ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा, रेलवे का अनुमान है कि इससे तेल आयात में करीब 13 करोड़ लीटर की कमी आएगी और CO2 उत्सर्जन में लगभग 65 करोड़ किलोग्राम की कटौती होगी, जो 2.60 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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