पंजाब: 'आप' के कुछ विधायकों के पाला बदलने से बीजेपी को मिली बढ़त, पर भगवंत मान सरकार की राह में चुनौतियां बरकरार
पंजाब की सियासत में सोमवार को उस वक्त हलचल तेज़ हो गई जब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के कुछ विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। यह दलबदल ऐसे समय में हुआ है जब भगवंत मान सरकार नशे की…
पंजाब की सियासत में सोमवार को उस वक्त हलचल तेज़ हो गई जब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के कुछ विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। यह दलबदल ऐसे समय में हुआ है जब भगवंत मान सरकार नशे की समस्या, बेरोजगारी, और राज्य पर बढ़ते कर्ज जैसी कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम से भाजपा को राज्य में अपनी ज़मीन मज़बूत करने का एक और मौका मिला है।
हालांकि, तीन विधायकों के पार्टी छोड़ने से 'आप' सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इसे मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए एक प्रतीकात्मक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा में शामिल होने वालों में हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौरामाजरा और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इस दलबदल ने विपक्ष के उन दावों को बल दिया है कि 'आप' के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
दलबदल के पीछे की वजहें
रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी छोड़ने वाले कुछ नेता उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से नाखुश थे, तो कुछ ने पार्टी नेतृत्व और शासन व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। इस्तीफ़ा देने वाले कम से कम दो विधायकों के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्रों में महत्व कम होने से नाराज़ थे। इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पंजाब में नशे की लत, गैंगस्टर गतिविधियों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक चुनौतियों जैसे मुद्दों को भी उठाया है।
भाजपा की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा
शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा पंजाब में अपने दम पर राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले 'आप' के सात राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हो चुके थे। पार्टी खुद को कानून-व्यवस्था और आर्थिक सुस्ती जैसे मुद्दों का समाधान पेश करने वाली एक ताकत के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, भाजपा और अकाली दल के बीच 2027 विधानसभा चुनाव से पहले फिर से गठबंधन के संकेत भी मिल रहे हैं, पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सरकार के सामने मौजूद चुनौतियां
नशा और अपराध: नशे की लत, तस्करी और ओवरडोज से मौतें आज भी पंजाब के सबसे गंभीर मुद्दों में से हैं। विपक्षी दल सरकार पर नशा खत्म करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हैं, जबकि सरकार 'युद्ध नशियान विरुद्ध' अभियान के तहत हज़ारों गिरफ्तारियों और संपत्तियों की ज़ब्ती का दावा करती है।
आर्थिक संकट: राज्य पर बढ़ता कर्ज एक और बड़ी चिंता है, जो विकास योजनाओं को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा, युवाओं में बेरोजगारी और विदेश पलायन की समस्या भी बनी हुई है, जो भगवंत मान सरकार के मूल्यांकन का एक बड़ा आधार हो सकता है।
'आप' सरकार का दावा और राजनीतिक भविष्य
इन चुनौतियों के बावजूद, मुख्यमंत्री भगवंत मान का तर्क है कि उनकी सरकार ने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया है। वह मुफ्त बिजली, सरकारी नौकरियों, आम आदमी क्लीनिक, शिक्षा सुधार और नशा विरोधी अभियानों को अपनी उपलब्धियों में गिनाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में 'आप' ने 117 में से 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि उस समय की सत्तारूढ़ कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई थी। पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अभी भी मजबूत माना जाता है और विधानसभा में उसके पास प्रचंड बहुमत है। इन दलबदलों से भाजपा को कुछ स्थानीय चेहरे ज़रूर मिले हैं, लेकिन इसका चुनावी लाभ कितना होगा, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा।
इनपुट: IANS



