DHFL लोन घोटाला: ED ने दिल्ली और महाराष्ट्र में ₹40 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कीं
दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में ₹40 करोड़…
दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में ₹40 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
कुर्क की गई संपत्तियों में नई दिल्ली के पॉश शांतिनिकेतन इलाके का एक आवासीय भूखंड और महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत में स्थित ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं। यह मामला DHFL के प्रवर्तकों, कपिल वाधवान और धीरज वाधवान द्वारा 17 बैंकों के एक समूह के साथ की गई कथित धोखाधड़ी से संबंधित है।
बैंकों को कैसे हुआ ₹34,615 करोड़ का नुकसान?
ED की जांच CBI द्वारा दर्ज एक FIR पर आधारित है, जो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। शिकायत के मुताबिक, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान और अन्य ने मिलकर बैंकों के समूह के साथ साजिश रची। इन बैंकों ने DHFL को कुल ₹42,871 करोड़ की ऋण सुविधाएं दी थीं। ED के अनुसार, DHFL की लेखा पुस्तकों में हेरफेर कर इस ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया, जिससे बैंकों को कुल ₹34,615 करोड़ का भारी नुकसान हुआ।
फर्जी कंपनी और खातों का जाल
जांच में यह खुलासा हुआ कि वाधवान परिवार सीधे या परोक्ष रूप से लगभग 225 कंपनियों को नियंत्रित करता था। DHFL के फॉरेंसिक ऑडिट में प्रवर्तकों से जुड़ी ऐसी 66 संस्थाओं की पहचान हुई, जिन्हें ₹29,100 करोड़ से अधिक का कर्ज दिया गया था। जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि एक फर्जी बांद्रा शाखा का इस्तेमाल कर DHFL से ₹11,549 करोड़ की राशि प्रवर्तकों द्वारा नियंत्रित 87 कंपनियों को भेजी गई। इस बड़ी रकम को लगभग 2.60 लाख फर्जी खुदरा उधारकर्ताओं के नाम पर होम लोन के रूप में दिखाया गया था, ताकि नियामक जांच से बचा जा सके और संबंधित पक्षों के लेनदेन को छिपाया जा सके।
मामले में अब तक की कार्रवाई
ED इस मामले में पहले ही मुंबई की विशेष PMLA अदालत में कपिल और धीरज वाधवान सहित 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। बाद में पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया। एजेंसी ने यह भी बताया कि 19 अगस्त 2026 को तलाशी के दौरान वाधवान परिवार की एक विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़े 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹51.75 करोड़) को फ्रीज किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि DHFL ने 2018-19 में अपराध से अर्जित ₹40.40 करोड़ मुंबई की दो फर्मों, रिलायबल सर्विसेज और मिलेनियम सर्विसेज को भेजे थे, जो वास्तव में कभी प्रदान नहीं की गई सेवाओं के बदले थे।
इनपुट: IANS



