कर्नाटक: घर-घर स्थायी निवास प्रमाण पत्र योजना पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल, कानूनी आधार मांगा
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की घर-घर जाकर स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) देने की नई योजना पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने इस पहल की…
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की घर-घर जाकर स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) देने की नई योजना पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने इस पहल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने सरकार से इस योजना का कानूनी आधार सार्वजनिक करने और इसे तत्काल रोकने की मांग की है।
सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा इस योजना का शुभारंभ किए जाने के बाद, समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, आर. अशोक ने एक बयान जारी कर सरकार के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया, "कर्नाटक सरकार ने एक खतरनाक संवैधानिक कदम उठाया है। यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया या सुधार नहीं है। इससे संविधान, कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिनका असर सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ सकता है।"
संवैधानिक अधिकार पर सवाल
भाजपा नेता ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से पूछा कि राज्य सरकार को स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने का संवैधानिक अधिकार किस प्रावधान के तहत मिला है। उन्होंने तर्क दिया, "संविधान के अनुसार नागरिकता, विदेशियों और आव्रजन से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद कर्नाटक सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए इन संवैधानिक सीमाओं को पार करने की कोशिश की है।" आर. अशोक के अनुसार, इस फैसले का कानूनी आधार बेहद संदिग्ध है।
योजना के समय पर भी आपत्ति
आर. अशोक ने इस योजना को लागू करने के समय को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह फैसला ठीक उस समय लिया गया है, जब पूरे देश में चुनाव आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान चला रहा है। उन्होंने सवाल किया, "इस फैसले का समय कई सवाल खड़े करता है।...इससे किसे फायदा होगा? ऐसे संवेदनशील समय में इसकी जरूरत क्यों पड़ी?" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए जिन 11 दस्तावेजों को मान्यता देता है, स्थायी निवास प्रमाण पत्र भी उनमें से एक है।
भाजपा की चेतावनी
विपक्ष के नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इन चिंताओं को नजरअंदाज किया तो भाजपा इस योजना का राजनीतिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि बिना स्पष्ट अधिकार और सुरक्षा उपायों के ऐसी योजना से फर्जी दस्तावेजों और व्यवस्था के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाएगा, जिसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। आर. अशोक ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा, "मैं जोरदार मांग करता हूं कि कर्नाटक सरकार तुरंत इस प्रक्रिया को रोके, पूरी पॉलिसी को सार्वजनिक करे और यह बताए कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत आगे बढ़ना चाहती है।" उन्होंने कहा, “संविधान कोई राजनीतिक खेल का मैदान नहीं है। भारत ऐसे खतरनाक उदाहरणों का जोखिम नहीं उठा सकता।”
इनपुट: IANS



