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ओडिशा: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, बीजद ने स्पीकर के फैसले को दी चुनौती

ओडिशा में इस साल 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग का विवाद अब विधानसभा से निकलकर अदालत तक पहुंच गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने अपने आठ विधायकों को…

ओडिशा: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, बीजद ने स्पीकर के फैसले को दी चुनौती
(फोटो: IANS)

ओडिशा में इस साल 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग का विवाद अब विधानसभा से निकलकर अदालत तक पहुंच गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने अपने आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग खारिज होने के बाद अब ओडिशा हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के फैसले को चुनौती दी है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बीजद की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) प्रमिला मलिक ने शुक्रवार को बताया कि इस संबंध में गुरुवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मलिक ने विधानसभा अध्यक्ष पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाते हुए कहा, "स्पीकर ने हमें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना एकतरफा फैसला लिया। हमने... स्पीकर के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा।"

क्या था पूरा मामला?

16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजद और कांग्रेस, दोनों विपक्षी दलों ने अपने कुछ विधायकों पर पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर क्रॉस-वोटिंग करने का आरोप लगाया था। इसके बाद बीजद ने अपने 8 और कांग्रेस ने अपने 3 विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के पास अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। बीजद का आरोप था कि इन विधायकों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर पार्टी के सामूहिक निर्णय की अवहेलना की।

स्पीकर ने क्यों खारिज की थीं याचिकाएं?

इसी साल जून महीने में स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने इन सभी 11 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि इन याचिकाओं में पर्याप्त दस्तावेजी सबूतों और सत्यापन का अभाव है। स्पीकर के मुताबिक, याचिकाएं 'अस्पष्ट', 'धुंधली' और 'बिना सबूत वाली' थीं और उनमें 'ओडिशा विधानसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम' के नियम 6 के उप-नियम 6 और 7 के तहत आवश्यक तथ्य पेश नहीं किए गए थे। अब बीजद ने इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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