ट्रंप प्रशासन के रूसी डीज़ल सौदे के ख़िलाफ़ अमेरिकी संसद में विधेयक, 2022 के कानून का उल्लंघन बताया
अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों के सांसदों ने मिलकर एक विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य ट्रंप प्रशासन द्वारा रूसी डीज़ल के आयात को दी गई एक छूट को रद्द करना है। सांसदों का…
अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों के सांसदों ने मिलकर एक विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य ट्रंप प्रशासन द्वारा रूसी डीज़ल के आयात को दी गई एक छूट को रद्द करना है। सांसदों का तर्क है कि यह छूट 2022 में बनाए गए उस कानून का सीधा उल्लंघन है जो रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम को प्रशासन के फैसले के खिलाफ़ कांग्रेस की ताज़ा पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
पिछले सप्ताह पेश किए गए इस विधेयक को 'रॉनल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट' नाम दिया गया है। इसे वाशिंगटन की डेमोक्रेट सांसद मैरी ग्लूसेनकैंप पेरेज़, पेंसिल्वेनिया के रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक और नेब्रास्का के रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने मिलकर पेश किया है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
इस विधेयक का केंद्रीय लक्ष्य अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा रूसी तेल आयात के लिए जारी की गई छूट को समाप्त करना है। इसके पारित होते ही "जनरल लाइसेंस 135" तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाएगा। इसके अलावा, विधेयक में भविष्य में रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात की अनुमति देने वाले किसी भी ऐसे सामान्य लाइसेंस या छूट को जारी करने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसमें यह भी प्रावधान है कि 2022 के प्रतिबंध कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी सौदे पर सरकारी धन खर्च नहीं किया जाएगा।
सांसदों ने क्या कहा?
सांसद मैरी ग्लूसेनकैंप पेरेज़ ने कहा, "राष्ट्रपति का रूसी तेल आयात करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, कांग्रेस की द्विदलीय सहमति और वर्ष 2022 में पारित कानून की अनदेखी करता है।" उन्होंने सुझाव दिया कि अगर राष्ट्रपति ईंधन की कीमतें कम करना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान में युद्ध समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचने देना चाहिए।
वहीं, रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने स्पष्ट किया, "अमेरिका को रूसी तेल की एक बूंद भी आयात नहीं करनी चाहिए।" उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने 2022 में भारी द्विदलीय समर्थन से यह फैसला लिया था और वह कानून अब भी प्रभावी है। एक अन्य रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने ट्रंप के पुराने रुख की ओर इशारा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पहले यूरोपीय देशों द्वारा रूसी ऊर्जा खरीदने की आलोचना करते थे, लेकिन अब उनका प्रशासन खुद रूस के लिए डीज़ल बेचने का रास्ता बना रहा है।
व्यापक संदर्भ और असर
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें पहले से ही बढ़ी हुई हैं। प्रशासन के रूसी डीज़ल खरीदने के फैसले पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इस मामले का असर भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि वाशिंगटन लगातार भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाता रहा है। वहीं, भारत ने पश्चिमी देशों द्वारा रूसी ऊर्जा खरीदने को लेकर दोहरे मानदंडों का मुद्दा उठाया है।
इनपुट: IANS



