ब्राजील: चुनावी नतीजों पर विवाद के बीच इलेक्टोरल कोर्ट का बयान, कहा- 'चुनाव कानून के दायरे में हुए'
ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) ने 2026 के चुनावों को लेकर उठे विवादों पर अपना पक्ष रखा है। कोर्ट के प्रमुख कैसियो नून्स मार्केस ने स्पष्ट किया है कि चुनाव पूरी तरह से सामान्य, कानूनी और…
ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) ने 2026 के चुनावों को लेकर उठे विवादों पर अपना पक्ष रखा है। कोर्ट के प्रमुख कैसियो नून्स मार्केस ने स्पष्ट किया है कि चुनाव पूरी तरह से सामान्य, कानूनी और संवैधानिक नियमों के अनुरूप संपन्न हुए। यह बयान उन आरोपों के बाद आया है, जिनमें चुनाव प्रक्रिया में धांधली का दावा किया गया था।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नून्स मार्केस ने बुधवार को अदालत की वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा, "मतदान पूरी चुनावी न्याय प्रणाली के तरह कराए गए। मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया और वैध तरीके से अपने प्रतिनिधियों को चुना।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मतदान के अंतिम चरणों में कुछ बाधाएं आईं, लेकिन अदालत के उपायों और तकनीकी कर्मचारियों की कुशलता से वोटों की गिनती सुचारू और सुरक्षित रूप से पूरी हो सकी।
चुनाव में धांधली के आरोप क्या थे?
यह पूरा विवाद सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो के एक खुले पत्र के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने चुनावी धांधली का आरोप लगाया था। रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के रनऑफ (दूसरे दौर) में उन्हें मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। बोल्सोनारो ने ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट (STF) पर मतदान का समय दो घंटे बढ़ाकर TSE के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह आदेश आधिकारिक समापन समय के बाद दिया गया, जिससे मतदाताओं के साथ असमान व्यवहार हुआ।
मतदान का समय क्यों बढ़ाया गया?
रविवार को दोनों राष्ट्रपति उम्मीदवारों के प्रचार दलों ने बताया था कि मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के बाद STF ने मतदान का समय शाम 7 बजे तक बढ़ाने का आदेश दिया। हालांकि, यह आदेश सिर्फ उन मतदान केंद्रों पर लागू हुआ जो शाम 5 बजे तक खुले थे। जो केंद्र पहले ही बंद हो गए थे, उन्हें दोबारा नहीं खोला गया।
हार-जीत के अंतर पर कितना असर?
ब्राजीलियाई मीडिया के मुताबिक, रविवार को हुए दूसरे दौर के मतदान में लूला ने बोल्सोनारो को 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक वोटों के अंतर से हराया। निर्धारित समय यानी शाम 5 बजे के बाद केवल 34,300 वोट ही डाले गए। यह संख्या लूला की जीत के अंतर की तुलना में बहुत कम है। इस बीच, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि बोल्सोनारो और उनका परिवार बुधवार सुबह फ्लोरिडा के मियामी पहुंच गए। उनके देश छोड़ने से ठीक पहले, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोरेस ने उन्हें पासपोर्ट जमा करने और देश छोड़ने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।
इनपुट: IANS



