तमिलनाडु: बिजली बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी की शिकायतें, गड़बड़ी स्वीकार कर समीक्षा में जुटा बिजली बोर्ड
तमिलनाडु में कई घरेलू उपभोक्ताओं ने हाल ही में अपने बिजली बिलों में दो से तीन गुना की अप्रत्याशित वृद्धि की शिकायत की है, जिससे राज्य में चिंता और राजनीतिक बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के…
तमिलनाडु में कई घरेलू उपभोक्ताओं ने हाल ही में अपने बिजली बिलों में दो से तीन गुना की अप्रत्याशित वृद्धि की शिकायत की है, जिससे राज्य में चिंता और राजनीतिक बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन शिकायतों के बाद तमिलनाडु विद्युत बोर्ड ने बिलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए इसकी समीक्षा के आदेश जारी किए हैं।
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार द्वारा लागू की गई एक प्रमुख कल्याणकारी योजना की पृष्ठभूमि में सामने आया है। सरकार ने अपने चुनावी वादे के अनुरूप पात्र घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत, एक बिलिंग चक्र में 500 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहली 200 यूनिट बिजली मुफ्त मिलनी थी।
बिलिंग प्रणाली में खामी और बोर्ड का स्पष्टीकरण
बढ़ते जन-विरोध के बीच तमिलनाडु उत्पादन और वितरण निगम (TANGEDCO) के पाडी जोन के मुख्य अभियंता ने एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर में माना गया है कि कुछ क्षेत्रों में बिलिंग प्रणाली में खामियों के कारण उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मीटर रीडिंग और बिल तैयार करने की प्रक्रिया में कमियों के चलते कुछ मामलों में गलत और बहुत अधिक राशि के बिल जारी हो गए।
विद्युत बोर्ड ने अब पर्यवेक्षण करने वाले इंजीनियरों को बिलिंग प्रक्रिया की नियमित रूप से जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, डिविजनल कार्यालयों को मीटर रीडिंग से जुड़ी समस्याओं की तुरंत पहचान कर उन्हें ठीक करने के लिए कहा गया है ताकि उपभोक्ताओं पर गलत बिलों का बोझ न पड़े। विभाग प्रभावित मामलों की समीक्षा करेगा और गलतियों को सुधारा जाएगा।
विवाद और राजनीतिक आरोप
शिकायत करने वाले कई उपभोक्ताओं का दावा है कि उनकी बिजली की खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी बिल बहुत ज़्यादा आए हैं। इस स्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि मुफ्त बिजली योजना की घोषणा के बाद चुपचाप बिजली की दरें बढ़ा दी गई हैं।
इसके अलावा, उपभोक्ता संगठन सरकार के दो महीने में एक बार बिल भेजने की व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव प्रचार के दौरान मासिक बिलिंग का वादा किया गया था और मौजूदा द्विमासिक प्रणाली से उपभोक्ताओं के लिए अपनी खपत पर नज़र रखना और मुफ्त बिजली योजना के लाभों को समझना मुश्किल हो रहा है।
इनपुट: IANS



