शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

इंदौर जल संकट: न्यायिक जांच रिपोर्ट में गायब दस्तावेज़ और प्रशासनिक देरी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए भागीरथपुरा जल संकट मामले में एक न्यायिक जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों ने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस…

इंदौर जल संकट: न्यायिक जांच रिपोर्ट में गायब दस्तावेज़ और प्रशासनिक देरी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए भागीरथपुरा जल संकट मामले में एक न्यायिक जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों ने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि रिपोर्ट से यह साफ होता है कि समस्या सिर्फ पानी के दूषित होने तक सीमित नहीं थी, बल्कि जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव और निगरानी में भी गंभीर खामियां थीं।

विज्ञापन

यह पूरा मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था, जब भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे और कई मौतें हुई थीं। इस त्रासदी की जांच के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट अगस्त में हाईकोर्ट को सौंप दी थी।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

कांग्रेस द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के विवरण के अनुसार, जांच में पाया गया कि भागीरथपुरा में सीवरेज का गंदा पानी पेयजल की पाइपलाइनों में मिल गया था, जिससे घरों तक पहुंचने वाला पानी पीने लायक नहीं रहा। पानी के नमूनों में ई. कोली और टोटल कोलीफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए थे, जो गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों का कारण बने। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को समय पर बदल दिया जाता, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।

जांच आयोग ने कुल 36 मौतों की पड़ताल की, जिनमें से 22 मौतों का सीधा संबंध दूषित पानी से पाया गया। हालांकि, मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आते रहे हैं।

गायब इंजीनियरिंग रिकॉर्ड और फाइलों में देरी

उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया कि जांच आयोग के सामने जल नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड पेश ही नहीं किए गए। उन्होंने कहा, “लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट और पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप जैसे तकनीकी दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए गए। सरकार को बताना चाहिए कि ये रिकॉर्ड क्यों गायब थे और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।”

इसके अलावा, कांग्रेस ने एक सीवरेज फाइल को मंजूरी देने में हुई अत्यधिक देरी का भी मुद्दा उठाया। सिंघार ने दावा किया कि यह फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक अटकी रही। हालांकि, जांच रिपोर्ट में सिर्फ इस आधार पर मेयर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, लेकिन कांग्रेस ने प्रशासनिक स्तर पर हुई इस देरी पर जवाबदेही की मांग की है।

मुआवजे और न्याय की मांग

जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रभावितों के लिए मुआवजे की भी सिफारिश की है। इसमें मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और बीमार हुए लोगों के लिए आर्थिक व चिकित्सा सहायता देने का सुझाव दिया गया है। कांग्रेस ने सरकार से इन सिफारिशों को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए पूछा है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा कब तक दिया जाएगा। सिंघार ने कहा, “भागीरथपुरा के लोगों को पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए।”

इनपुट: IANS

N

News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

News4Social मध्य प्रदेश डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से मध्य प्रदेश से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →