शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ ED की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट

पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और कस दिया है। एजेंसी ने इस मामले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी सहयोगी

बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ ED की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और कस दिया है। एजेंसी ने इस मामले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चार्जशीट 25 जून को कोलकाता स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा दायर की गई थी।

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ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई 18 अप्रैल, 2024 की मूल चार्जशीट और 18 अक्टूबर, 2025 को दाखिल की गई पहली पूरक चार्जशीट के क्रम में की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

कैसे हुआ था पूरा घोटाला?

PMLA के तहत हुई जांच में सामने आया कि यह भर्ती घोटाला कई स्तरों पर किया गया था। इसमें OMR स्कोर में हेराफेरी, पर्सनैलिटी टेस्ट के नंबरों में हेरफेर और पैनल की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से नौकरियां दी गईं। ईडी ने अपने बयान में कहा है कि इस प्रक्रिया में हजारों योग्य उम्मीदवारों को उनके अधिकार से वंचित कर दिया गया, जबकि अपात्र लोगों को नियमों का उल्लंघन कर शिक्षक के पदों पर नियुक्त किया गया।

पार्थ चटर्जी की भूमिका पर ED का खुलासा

जांच एजेंसी ने बताया कि पार्थ चटर्जी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC), माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्न बिचौलियों के साथ मिलकर अवैध भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी के मुताबिक, अयोग्य उम्मीदवारों से नौकरी की सिफारिश और नियुक्ति के बदले में अवैध रूप से रिश्वत ली गई। इस आपराधिक कमाई को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के माध्यम से खपाकर उसे बेदाग संपत्ति के तौर पर पेश किया गया।

इस मामले में अब तक की कार्रवाई में ईडी ने कुल तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए हैं, जिसके तहत 301.58 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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