बंगाल में डेंगू का बढ़ता ख़तरा: स्वास्थ्य विभाग ने 5 ज़िलों को बताया 'सबसे संवेदनशील'
पश्चिम बंगाल में बदलते मौसम और लगातार बारिश के बीच डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने और…
पश्चिम बंगाल में बदलते मौसम और लगातार बारिश के बीच डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने और मौजूदा मानसून में डेंगू के मामलों में हुई वृद्धि को देखते हुए, विभाग ने राज्य के पांच ज़िलों को सबसे ज़्यादा जोखिम वाला क्षेत्र घोषित किया है।
इन संवेदनशील ज़िलों में राजधानी कोलकाता के अलावा हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में न सिर्फ डेंगू के मामले बढ़े हैं, बल्कि इससे होने वाली मौतों की संख्या भी चिंता का विषय है।
बीमारी के दोहरे खतरे की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, डेंगू के साथ-साथ इन पांचों जिलों में 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' के मामले भी दर्ज किए गए हैं। यह मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार माना जाता है, जो सीधे किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाती है।
आंकड़े न छिपाने के सख़्त निर्देश
इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों और डॉक्टरों को डेंगू के मामलों की सही-सही जानकारी देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को 'अज्ञात बुखार' बताने की कोई जरूरत नहीं है।" मुख्यमंत्री ने पिछली ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौरान प्रभावितों और मृतकों की संख्या को कम करके बताया जाता था और डॉक्टरों पर डेंगू को 'अज्ञात बुखार' लिखने का दबाव बनाया जाता था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। छिपाने के लिए क्या है? अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा।" उन्होंने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि वे बिना किसी डर के सही बीमारी का उल्लेख करें।
इनपुट: IANS



