बांग्लादेश: शिक्षाविद जफर इकबाल समेत 8 लोगों पर मानवता-विरोधी अपराध के आरोप तय, गिरफ्तारी वारंट जारी
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई 2024 में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में आठ प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है…
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई 2024 में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में आठ प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों में प्रमुख शिक्षाविद मोहम्मद जफर इकबाल, ढाका विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एएसएम मकसूद कमाल और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एएचएम शम्सुद्दीन चौधरी माणिक शामिल हैं।
न्यायमूर्ति एमडी गोलाम मुर्तजा मजूमदार की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने रविवार को अभियोजन पक्ष द्वारा दाखिल किए गए आरोपों का संज्ञान लिया। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने पांच आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। इनमें जफर इकबाल, मकसूद कमाल, अवामी लीग की छात्र शाखा के पूर्व अध्यक्ष सद्दाम हुसैन, तत्कालीन महासचिव शेख वली आसिफ एनान और ढाका विश्वविद्यालय छात्र लीग के तत्कालीन अध्यक्ष मजहरुल कबीर शायन का नाम है।
कानूनी कार्यवाही और मानवाधिकार चिंताएं
इस मामले में तीन अन्य आरोपी पहले से ही हिरासत में हैं—पूर्व न्यायाधीश माणिक, ढाका विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के शिक्षक एकेएम जमाल उद्दीन और ढाका विश्वविद्यालय छात्र लीग के पूर्व महासचिव तनबीर हसन शैकत। ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को इन तीनों को 22 अक्टूबर को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
इस बीच, फ्रांस स्थित एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन 'जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश' (JMBF) ने इस कार्यवाही की कड़ी निंदा की है। संगठन ने एक बयान में कहा कि यह जांच “राजनीतिक रूप से प्रेरित और पक्षपातपूर्ण तरीके” से की गई है और इसमें निष्पक्ष जांच के न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं हुआ है। JMBF के अनुसार, “मानवता के खिलाफ अपराध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सबसे गंभीर अपराधों में शामिल हैं। ऐसे आरोपों को राजनीतिक विरोधियों, असहमति रखने वाली आवाजों, शिक्षाविदों, लेखकों, शिक्षकों या न्यायाधीशों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के साधन में बदलना न्याय का गंभीर दुरुपयोग है।”
अकादमिक स्वतंत्रता पर खतरा
JMBF ने चेतावनी दी कि शिक्षाविदों की अकादमिक गतिविधियों या पेशेवर भूमिकाओं को मानवता के खिलाफ अपराध बताकर उन पर मुकदमा चलाना अकादमिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है। संगठन ने कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा या पिछली सरकार से संबंध के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, बल्कि हर आरोपी के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य होने चाहिए। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले पर करीबी नजर रखने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक कदम उठाने का आह्वान किया है।
इनपुट: IANS



