बांग्लादेश: टीकाकरण में बड़ी चूक, खसरे का जानलेवा प्रकोप जारी, हर दिन 4 बच्चों की मौत
बांग्लादेश में खसरे का संकट लगातार बना हुआ है, जिसमें हर दिन औसतन चार बच्चों की जान जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस गंभीर स्वास्थ्य संकट की सबसे बड़ी वजह 'टीकाकरण गैप' यानी…
बांग्लादेश में खसरे का संकट लगातार बना हुआ है, जिसमें हर दिन औसतन चार बच्चों की जान जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस गंभीर स्वास्थ्य संकट की सबसे बड़ी वजह 'टीकाकरण गैप' यानी लाखों बच्चों का टीके से वंचित रह जाना है। सरकार के आपातकालीन टीकाकरण अभियान के बावजूद, अस्पतालों में बिना टीके वाले मरीज़ों की बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि कवरेज में गंभीर कमियाँ रह गई हैं।
आँकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से अब तक इस बीमारी से जुड़ी कन्फर्म और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 797 तक पहुँच गई है। सिर्फ़ मंगलवार को ही कम से कम चार बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। जुलाई के पहले तीन हफ्तों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही, जब हर दिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आए और 821 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
विशेषज्ञों की चिंता और टीकाकरण की हकीकत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रकोप के बने रहने के पीछे कई कारण बताए हैं, जिनमें लगभग 40 लाख बच्चों का टीकाकरण से छूटना, संक्रमण का निर्धारित आयु वर्ग से बाहर फैलना और संक्रमण की रोकथाम के कमजोर उपाय शामिल हैं। डीएनसीसी डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी आसिफ हैदर ने बताया कि वर्तमान में भर्ती खसरे के 80 से 90 प्रतिशत मरीज़ों का टीकाकरण नहीं हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रविवार तक 24 घंटों में भर्ती हुए 74 खसरा मरीज़ों में से सिर्फ पाँच को ही टीका लगा था।
खसरा और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने कहा, "स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन टीकाकरण अभियान के दो महीने बाद भी यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी इस स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।"
'चौंकाने वाला' अंतर और अधूरी योजना
विशेषज्ञों ने टीकाकरण के आँकड़ों में भारी अंतर पर हैरानी जताई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने 40 लाख बच्चों के अंतर को "चौंकाने वाला" बताते हुए कहा कि यह बेहद कम टीकाकरण लक्ष्य की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, "अगर लक्ष्य ही सही नहीं था, तो ऐसा परिणाम आना स्वाभाविक था।" अहमद के मुताबिक, अपर्याप्त योजना और सीमित जन-जागरूकता अभियानों ने खसरा टीकाकरण कार्यक्रम को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे कई परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम से अनजान रह गए।
इनपुट: IANS



