बांग्लादेश में बच्चों पर दोहरी मार: कुपोषण और कमज़ोर टीकाकरण से खसरे का क़हर, हज़ारों मौतें
बांग्लादेश में खसरा एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है, जहाँ लाखों बच्चे इसके संदिग्ध संक्रमण की चपेट में हैं और हज़ारों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS ने द डेली स्टार की
बांग्लादेश में खसरा एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है, जहाँ लाखों बच्चे इसके संदिग्ध संक्रमण की चपेट में हैं और हज़ारों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS ने द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि कुपोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और टीकाकरण की घटती दर ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्थिति बेहद चिंताजनक बना दी है।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च से 30 जून 2024 के बीच देश में खसरे के 1,01,077 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में, इस बीमारी से जुड़ी 6,258 बच्चों की मौत की भी पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो कोरोना वायरस से भी तेज़ी से फैल सकती है, और कुपोषित बच्चे इसके सबसे आसान शिकार होते हैं।
कमज़ोर होती टीकाकरण की ढाल
रिपोर्ट के मुताबिक़, बांग्लादेश में बच्चों के टीकाकरण कवरेज में लगातार गिरावट देखी जा रही है। साल 2019 में जहाँ 12 से 23 महीने के 83.9% बच्चों को सभी टीके लग चुके थे, वहीं 2023 में यह आँकड़ा घटकर 81.6% रह गया। यह गिरावट शहरी क्षेत्रों में ज़्यादा है, जहाँ केवल 79% बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 84.6% है।
हालांकि, जन्म के समय बीसीजी टीके की कवरेज 98% से अधिक है, लेकिन 15 महीने की उम्र तक कई बच्चे, विशेष रूप से खसरा-रूबेला (MR-2) की दूसरी खुराक लेने से चूक जाते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों ने टीकों और टीकाकरण कार्ड जैसी ज़रूरी चीज़ों की कमी की भी शिकायत की है, जो इस कार्यक्रम के सामने बड़ी चुनौती है।
कुपोषण और निमोनिया का बढ़ता ख़तरा
खसरे के अलावा, निमोनिया भी बच्चों के लिए एक बड़ा ख़तरा बना हुआ है, जिससे हर साल लगभग 24,000 बच्चों की मौत होती है, यानी प्रतिदिन औसतन 60 मौतें। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषित बच्चों में इन बीमारियों से गंभीर जटिलताएँ और मौत का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
देश में बच्चों के पोषण की स्थिति भी गंभीर है। केवल 56% शिशुओं को जन्म के पहले छह महीने तक विशेष रूप से स्तनपान मिल पाता है। इसके लिए किशोरावस्था में मातृत्व, कामकाजी महिलाओं के लिए सुविधाओं का अभाव और फॉर्मूला दूध की आसान उपलब्धता जैसे कारणों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। इसके अलावा, पाँच साल से कम उम्र के 43.6% बच्चे एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, जिसकी मुख्य वजह भोजन में आयरन, विटामिन ए, डी और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी है।
इनपुट: IANS



