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विदेशी नागरिकों से साइबर ठगी: ED ने दिल्ली-गोवा समेत कई राज्यों में 187 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी नागरिकों के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में कड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय…

विदेशी नागरिकों से साइबर ठगी: ED ने दिल्ली-गोवा समेत कई राज्यों में 187 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं
(फोटो: IANS)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी नागरिकों के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में कड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध से जुड़े धन शोधन मामले में 187.13 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं। जब्त की गई संपत्तियों में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित आलीशान फार्महाउस और विला जैसी अचल संपत्तियां शामिल हैं।

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यह पूरा मामला अवैध कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने से जुड़ा है। ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एक FIR के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई को यह जानकारी अमेरिकी जांच एजेंसी FBI से मिली थी, जिसमें अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।

कैसे काम करता था यह धोखाधड़ी का नेटवर्क?

ED की जांच में सामने आया कि 'डिजिकैप्स – द फ्यूचर ऑफ डिजिटल' नाम से एक अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। इसमें जिगर अहमद, यश खुराना, इंदरजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा समेत 36 कर्मचारी काम करते थे। ये सभी जोनी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा की निगरानी में थे। ये लोग तकनीकी सहायता देने की आड़ में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे।

आरोपी पहले पीड़ितों की महत्वपूर्ण जानकारी चुरा लेते थे और फिर उन्हें अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) की तरफ से कानूनी कार्रवाई की धमकी देते थे। इसके बाद, डरा-धमकाकर पीड़ितों को अपनी रकम क्रिप्टो खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस तरह ठगी गई रकम को क्रिप्टो वॉलेट के जरिए निकालकर निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।

फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश

जांच में पता चला कि अपराध से हुई कमाई को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीका अपनाया। इस रकम को 'ब्लिस इन्फ्राप्रॉपर्टीज एलएलपी' जैसी फर्जी कंपनियों में भेजा गया और फिर हरियाणा, दिल्ली और गोवा में महंगी अचल संपत्तियों में निवेश कर दिया गया। आरोपियों में जोनी उर्फ जोनी त्यागी, दक्षय सेठी, राघव सतीहा, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम ढिंगरा के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।

इससे पहले, इसी साल जनवरी और फरवरी में ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान 34 लाख रुपये की नकदी, कई डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे। फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social पंजाब डेस्क

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