रविवार, 26 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश: गैस संकट गहराया, चूल्हे ठंडे पड़े, उद्योगों पर भी असर

बांग्लादेश एक गंभीर गैस संकट से जूझ रहा है, जिसका असर घरों की रसोई से लेकर बड़े उद्योगों तक महसूस किया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट की मुख्य वजह कॉक्स बाजार में एक…

बांग्लादेश: गैस संकट गहराया, चूल्हे ठंडे पड़े, उद्योगों पर भी असर
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश एक गंभीर गैस संकट से जूझ रहा है, जिसका असर घरों की रसोई से लेकर बड़े उद्योगों तक महसूस किया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट की मुख्य वजह कॉक्स बाजार में एक फ्लोटिंग स्टोरेज और रीगैसिफिकेशन यूनिट (FSRU) में हुआ हादसा है। 21 जुलाई को इस यूनिट में आग लगने से इसका एक बॉयलर क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद इसे बंद करना पड़ा।

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इस घटना के कारण देश भर में गैस की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। आपूर्ति घटकर 2,150 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन (MMCFD) से भी नीचे चली गई है, जबकि देश की दैनिक मांग लगभग 3,800 MMCFD है। पिछले एक साल में औसत आपूर्ति करीब 2,700 MMCFD रही है। पेट्रोबांग्ला के जनसंपर्क अधिकारी तारिकुल इस्लाम खान ने बताया है कि यूनिट की मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इसे फिर से चालू होने में अभी और समय लगेगा।

आम जीवन और उद्योग पर असर

गैस की कमी का सबसे सीधा प्रभाव आम लोगों पर पड़ा है। ढाका के मीरपुर, बड्डा, मोहम्मदपुर और रामपुरा जैसे कई इलाकों में लोगों ने गैस चूल्हों के काम न करने की शिकायत की है। इस वजह से कम आय वाले कई परिवार लकड़ी पर खाना पकाने के लिए मजबूर हैं, जबकि अन्य लोग महंगे इलेक्ट्रिक कुकर या LPG सिलेंडर का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनका मासिक बजट बढ़ गया है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण मोहम्मदपुर समेत कई जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है।

यह संकट केवल रसोई तक सीमित नहीं है। औद्योगिक क्षेत्र भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और निर्यात क्षमता पर भी खतरा मंडरा रहा है। टेक्सटाइल, सिरेमिक और खाद जैसे गैस पर निर्भर उद्योग कम आपूर्ति के कारण अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। कपड़ा रंगने वाली फैक्ट्रियों को विशेष रूप से नुकसान हो रहा है, क्योंकि गैस के दबाव में उतार-चढ़ाव से कपड़ों के पूरे बैच खराब हो सकते हैं।

बिजली कटौती की आशंका बढ़ी

गैस की कमी ने देश के ऊर्जा क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। 'पेट्रोबांग्ला' के हवाले से बताया गया है कि गैस से चलने वाले बिजली उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की कमी आई है, जिससे आने वाले दिनों में बिजली कटौती की चिंता बढ़ गई है। टाइटस गैस ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन पीएलसी ने कहा है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, ढाका और आसपास के इलाकों में गैस का दबाव कम बना रहेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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