बांग्लादेश: तीन महीनों में हिंसा की 74 घटनाएँ, मानवाधिकार रिपोर्ट ने भीड़ और राजनीतिक संघर्षों पर जताई चिंता
बांग्लादेश में इस साल अप्रैल से जून के बीच की तिमाही हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन की गंभीर तस्वीर पेश करती है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में…
बांग्लादेश में इस साल अप्रैल से जून के बीच की तिमाही हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन की गंभीर तस्वीर पेश करती है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में भीड़ की हिंसा और राजनीतिक झड़पों के कारण कुल 74 लोगों की जान चली गई। ढाका स्थित संगठन 'अधिकार' द्वारा जारी इस रिपोर्ट में देश की कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीन महीनों में 33 लोगों की मौत भीड़ के हमलों में हुई, जबकि 41 लोगों ने राजनीतिक संघर्षों में अपनी जान गंवाई। इन राजनीतिक झड़पों में 970 अन्य लोग घायल भी हुए। संगठन ने बताया कि भीड़ द्वारा मारे गए ज़्यादातर लोगों पर चोरी या डकैती का शक था। यह स्थिति कानून व्यवस्था में जनता के घटते विश्वास का संकेत देती है, जिसके चलते लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।
राजनीतिक दलों में आंतरिक संघर्ष
रिपोर्ट में राजनीतिक हिंसा के लिए सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर की गुटबाजी को एक बड़ा कारण बताया गया है। इस दौरान बीएनपी में आपसी संघर्ष की 57 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई और 400 लोग घायल हुए। इन विवादों की वजह जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, स्थानीय चुनाव टिकट और पार्टी कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दे थे। वहीं, नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में भी आंतरिक संघर्ष की दो घटनाओं में 16 लोग घायल हुए।
महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिरासत में मौतें
मानवाधिकार संगठन ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर भी ध्यान खींचा है। इस अवधि में दुष्कर्म के 255 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 93 महिलाएँ और 161 लड़कियाँ पीड़ित थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीएनए जांच की सीमित सुविधा और कानूनी प्रक्रिया में देरी के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तीन न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग) का भी ज़िक्र है। इनमें से एक व्यक्ति की मौत कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना से, दूसरे की पिटाई से और एक मछुआरे की वन विभाग की गोली से हुई।
जेलों की बदहाली और पत्रकारों पर हमले
रिपोर्ट बांग्लादेश की जेलों की दयनीय स्थिति को भी उजागर करती है। 17 मई तक देश की 75 जेलों में क्षमता से लगभग दोगुने, यानी 43,157 के मुकाबले 85,000 से अधिक कैदी बंद थे। इस दौरान बीमारी के कारण 16 कैदियों की मौत हो गई। संगठन ने पत्रकारों की सुरक्षा पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इस अवधि में 17 पत्रकार घायल हुए और कई को हमलों व धमकियों का सामना करना पड़ा। अधिकार ने इन सभी मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इनपुट: IANS



