गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश में खसरे का गंभीर प्रकोप: सरकारी वैक्सीन नीति पर उठे गंभीर सवाल

बांग्लादेश इस समय खसरे के एक गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है, जहाँ मार्च के मध्य से अब तक 32,000 से ज़्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक…

बांग्लादेश में खसरे का गंभीर प्रकोप: सरकारी वैक्सीन नीति पर उठे गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश इस समय खसरे के एक गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है, जहाँ मार्च के मध्य से अब तक 32,000 से ज़्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस संकट के लिए अंतरिम सरकार की वैक्सीन खरीद नीति में बदलाव को ज़िम्मेदार ठहराया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सितंबर 2025 में UNICEF के ज़रिए वैक्सीन खरीदने की लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को रोक दिया था। इसके बजाय एक खुली निविदा प्रक्रिया (ओपन टेंडर) अपनाने का फैसला किया गया, लेकिन अफसरशाही के कारण उसमें देरी हो गई। इस वजह से टीकों की आपूर्ति में कमी आई और नियमित टीकाकरण कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ।

बीमारी का फैलाव और टीकाकरण में गिरावट

यह बीमारी जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों से शुरू हुई और देखते ही देखते देश के 64 में से 58 जिलों में फैल गई। इसके चलते 21,000 से ज़्यादा लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। 'द डेली स्टार' अख़बार ने 'साइंस डॉट ओआरजी' का हवाला देते हुए बताया कि चेतावनियों के बावजूद सरकार ने खरीद प्रक्रिया रोकी, जिससे बीमारी फैलने का खतरा था।

सरकारी आँकड़े बताते हैं कि 2025 में केवल 59% योग्य बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया था, हालाँकि बाद में इन आँकड़ों को आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिया गया। बांग्लादेश के 'कवरेज इवैल्यूएशन सर्वे 2026' के अनुसार, खसरा-रूबेला की पहली डोज़ का कवरेज 2019 में 88.6% से घटकर 2023 में 86% रह गया, जबकि दूसरी डोज़ का कवरेज 89% से घटकर 80.7% पर आ गया। खसरे को रोकने के लिए आमतौर पर 95% कवरेज की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों की राय और कानूनी कार्रवाई

आईईडीसीआर के पूर्व प्रिंसिपल साइंटिस्ट एएसएम आलमगीर ने बताया कि 2024 से विटामिन ए वितरण अभियान के नाकाम रहने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कमज़ोर हो गई है। वहीं, डीजीएचएस में रोग नियंत्रण के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद का मानना है कि हालांकि सरकार ने अप्रैल में यूनिसेफ से फिर खरीद शुरू कर दी है, लेकिन प्रकोप की रफ़्तार को देखते हुए इसे जल्दी काबू में लाना मुश्किल है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के वकील बिप्लब कुमार दास ने अंतरिम सरकार के तहत कथित भ्रष्टाचार और टीके की खरीद में विफलता को लेकर भ्रष्टाचार-रोधी आयोग (एंटी-करप्शन कमीशन) में शिकायत दर्ज कराई है।

इनपुट: IANS

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