रविवार, 27 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, मृतकों का आंकड़ा 1100 के करीब पहुंचा

बांग्लादेश इस समय खसरे के एक बड़े प्रकोप से जूझ रहा है, जहाँ इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों की संख्या 1,096 तक पहुँच गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक के पिछले…

बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, मृतकों का आंकड़ा 1100 के करीब पहुंचा
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश इस समय खसरे के एक बड़े प्रकोप से जूझ रहा है, जहाँ इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों की संख्या 1,096 तक पहुँच गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक के पिछले 24 घंटों में ही खसरे जैसे लक्षणों के कारण नौ और बच्चों ने दम तोड़ दिया, जिससे देश में स्वास्थ्य संकट की गंभीरता और बढ़ गई है।

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स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, इन नौ नई मौतों को संदिग्ध खसरा मौत के रूप में दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, देश में संदिग्ध मौतों का कुल आंकड़ा बढ़कर 995 हो गया है, जबकि लैब द्वारा पुष्टि की गई मौतों की संख्या 101 पर बनी हुई है।

संक्रमण के नए मामले और अस्पताल में भर्ती

पिछले 24 घंटों के दौरान संक्रमण की स्थिति चिंताजनक बनी रही। इस अवधि में 1,228 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,88,041 हो गई है। इसी दौरान, लैब जांच में 113 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिससे प्रमाणित मामलों का कुल आंकड़ा 21,212 पर पहुँच गया है।

आंकड़ों से पता चलता है कि 15 मार्च से अब तक खसरे के 1,66,310 संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 1,59,519 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में नीतिगत विफलता का उल्लेख

कनाडा स्थित 'ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस' (GCDG) ने इस प्रकोप को हाल के इतिहास में बांग्लादेश के सबसे खराब सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में समूह ने कहा कि यह संकट अचानक नहीं आया, बल्कि इसे रोका जा सकता था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान (2024-2025) टीका आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई बाधाओं का परिणाम है। इसमें नियमित टीकाकरण का छूटना, टीका खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाली आबादी की समय पर पहचान करने में विफलता जैसे कारण शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के माध्यम से टीके खरीदने की स्थापित प्रणाली को बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई थी, जिसके कारण टीके की कमी को लेकर यूनिसेफ ने कई बार चेतावनी भी दी थी।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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