रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर मंडराया 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा, महंगाई और सुस्त विकास दर बनी बड़ी चुनौती

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय दोहरी मार झेल रही है — एक तरफ लगातार बढ़ती महंगाई और दूसरी तरफ आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार। इन दोनों के मेल से देश पर 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा बढ़ता जा रहा है, जो एक…

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर मंडराया 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा, महंगाई और सुस्त विकास दर बनी बड़ी चुनौती
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय दोहरी मार झेल रही है — एक तरफ लगातार बढ़ती महंगाई और दूसरी तरफ आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार। इन दोनों के मेल से देश पर 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा बढ़ता जा रहा है, जो एक ऐसी स्थिति है जहाँ महंगाई के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियाँ भी सुस्त पड़ जाती हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, निजी निवेश में कमी और लोगों की घटती खरीदारी की ताकत ने इन आर्थिक चुनौतियों को और भी गंभीर बना दिया है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने इन समस्याओं को पैदा नहीं किया है, बल्कि पहले से मौजूद आर्थिक कमजोरियों को और उजागर कर दिया है। संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, परिवहन और आयात की लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

महंगाई की मार और घटती क्रय शक्ति

बांग्लादेश में महंगाई एक बड़ी चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में समग्र महंगाई दर मामूली घटकर 8.26% पर आ गई, जो जुलाई में 8.32% थी। हालांकि, इसी दौरान गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 9.32% पर पहुंच गई।

चिंता की बात यह है कि लोगों के वेतन में बढ़ोतरी महंगाई की रफ्तार से मेल नहीं खा रही है। अगस्त में वेतन वृद्धि दर करीब 8.05% रही, जो महंगाई दर से कम है। इसका सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है और उनकी वास्तविक क्रय शक्ति लगातार कम हो रही है। आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं की बढ़ती लागत से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है, जिससे उपभोक्ता मांग में कमी आने की आशंका है।

आर्थिक विकास के अनुमान भी चिंताजनक

ढाका के समाचार पत्र 'द फाइनेंशियल एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में देश की आर्थिक विकास दर को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि दर 3.9% रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान 3.5% रखा है। विश्लेषकों के अनुसार, विकास की यह धीमी गति देश में पर्याप्त रोजगार पैदा करने, लोगों की आय बढ़ाने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नाकाफी हो सकती है।

बुनियादी समस्याओं का समाधान जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े भले ही कम हों, लेकिन बड़े पैमाने पर अल्परोजगार और कम उत्पादकता वाली नौकरियां श्रम बाजार की गंभीर चुनौतियों को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की राह में निजी निवेश की कमी, बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव, नियामकीय अनिश्चितता और कारोबारियों का घटता भरोसा जैसी संरचनात्मक समस्याएं बड़ी बाधाएं हैं। जब तक इन बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक वैश्विक हालात सुधरने के बाद भी अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन का दबाव बना रह सकता है।

इनपुट: IANS

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