शेख हसीना का बड़ा आरोप: 'सुनियोजित अभियान' के तहत हटाए गए, बांग्लादेश 'खतरनाक दौर' में
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि मुल्क एक 'बहुत खतरनाक' दौर में पहुंच गया है। एक अंतरराष्ट्रीय संवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने…
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि मुल्क एक 'बहुत खतरनाक' दौर में पहुंच गया है। एक अंतरराष्ट्रीय संवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि 2024 में आरक्षण सुधार आंदोलन की आड़ में उनकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटाने के लिए एक "बेहद सुनियोजित अभियान" चलाया गया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 'रीइन्वेंटिंग बांग्लादेश: ए वर्ल्ड क्राइसिस टू ओवरकम' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हसीना ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यूनुस, वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान और कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने मिलकर इन प्रदर्शनों को आगे बढ़ाया।
हिंसा और चरमपंथ के आरोप
हसीना ने आरोप लगाया कि जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों में हिंसक चरमपंथी न केवल शामिल थे, बल्कि वे इसके "आयोजक और लाभार्थी भी थे।" उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान चरमपंथी नेताओं ने दोबारा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना शुरू कर दिया। उनके मुताबिक, उनका एकमात्र उद्देश्य "लाशें गिराना, जनाक्रोश पैदा करना और सरकार को गिराना" था।
कानून-व्यवस्था और संस्थानों पर हमला
पूर्व प्रधानमंत्री ने देश में कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का दावा किया। उन्होंने कहा, "इन उपद्रवियों ने 460 पुलिस थानों को आग के हवाले कर दिया, जिससे कई स्थानों पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई।" शेख हसीना ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर उनके शवों को ओवरब्रिज से लटका दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को "झूठे मामलों" में फंसाकर जेल भेजा गया और कई न्यायाधीशों पर चाकू और हथियारों से हमला कर उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया। हसीना के अनुसार, जेलों पर हमले हुए, जिसके बाद दोषी और आरोपी उग्रवादी या तो भाग गए या जमानत पर रिहा हो गए। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के कई नेताओं को भी रिहा कर दिया गया।
अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों की स्थिति
शेख हसीना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यापक हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हिंदू, ईसाई, बौद्ध, अहमदिया समुदायों, सूफी दरगाहों और अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थानों पर हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों, पत्रकारों, और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मार डाला गया, जबकि महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार कर उनकी हत्या कर दी गई।
अपनी सरकार के दौरान हुई प्रगति के नष्ट होने का दावा करते हुए हसीना ने कहा, "गरीबी बढ़ रही है। लोगों का जीवन असुरक्षित हो गया है... लेकिन सत्ता में बैठे लोग केवल सत्ता और धन का आनंद ले रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीन न मिलने के कारण सैकड़ों बच्चों की मौत हो गई।
इनपुट: IANS



