बांग्लादेश में बढ़ती किशोर हिंसा: गरीबी, सोशल मीडिया और गैंग कल्चर ने बढ़ाई चिंता
बांग्लादेश में किशोरों द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाओं में हो रही वृद्धि ने समाज और प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। हाल ही में कुमिल्ला जिले में 13 वर्षीय इशायात शाहरीआर अप्रतीम की…
बांग्लादेश में किशोरों द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाओं में हो रही वृद्धि ने समाज और प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। हाल ही में कुमिल्ला जिले में 13 वर्षीय इशायात शाहरीआर अप्रतीम की हत्या ने इस मुद्दे को फिर से सतह पर ला दिया है। समाचार एजेंसी IANS ने द बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि यह घटना किशोरों के बीच बढ़ते गैंग कल्चर, सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव और पारिवारिक-सामाजिक मूल्यों में गिरावट की ओर इशारा करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या की जड़ें काफी गहरी हैं और इसका समाधान सिर्फ पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है। ढाका विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर ए. आई. महबूब उद्दीन अहमद के अनुसार, बांग्लादेश में किशोर अपराध के लिए मुख्य रूप से गरीबी और बेरोजगारी जैसे सामाजिक-आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याएं एक बड़ी सामाजिक विफलता का संकेत हैं।
समस्या के मूल कारण क्या हैं?
कई विशेषज्ञों ने किशोरों के अपराध की दुनिया में जाने के पीछे विभिन्न कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। ढाका विश्वविद्यालय के अपराध विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रेजाउल करीम शोहाग ने कहा कि सरकार को उन आर्थिक और सामाजिक वजहों पर ध्यान देना चाहिए जो बच्चों को ऐसे समूहों में शामिल होने के लिए मजबूर करती हैं। इनमें सुरक्षित मनोरंजन स्थलों की कमी, गरीबी, बेरोजगारी और स्कूल छोड़ने जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
सोशल मीडिया और गैंग कल्चर की भूमिका
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल, ढाका के एसोसिएट प्रोफेसर हेलाल उद्दीन अहमद ने किशोरों में तेजी से फैल रहे गैंग कल्चर में सोशल मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म एक ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां किशोर उम्र से पहले 'बड़ा' दिखने, आक्रामक व्यवहार अपनाने और ध्यान आकर्षित करने के लिए हिंसक वीडियो बनाने की होड़ में लगे हैं।
समाधान के लिए एकीकृत प्रयास जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। प्रोफेसर शोहाग ने कहा, "किशोर अपराध रोकने के लिए परिवार, स्कूल, समुदाय, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और सरकार के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं।" इसी तरह, प्रोफेसर अहमद ने भी कहा कि बचपन से ही परिवार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर देकर बच्चों को अपराध से दूर रखा जा सकता है। बांग्लादेशी शोधकर्ता शाहजेब महमूद ने देश की किशोर न्याय प्रणाली की कमियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में किशोरों के लिए पर्याप्त सुधार गृह नहीं हैं और पुनर्वास पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे मौजूदा कानून बच्चों को सुधारने के बजाय उन्हें और अधिक आपराधिक व्यवस्था की ओर धकेल सकते हैं।
इनपुट: IANS



