मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बलूचिस्तान: छात्र नेता शब्बीर बलोच की गुमशुदगी को एक दशक, परिवार और मानवाधिकार संगठन मांग रहे जवाब

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में छात्र नेता शब्बीर बलोच के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने की घटना को एक दशक हो गया है। इस मौके पर कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों और छात्र संगठनों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से…

बलूचिस्तान: छात्र नेता शब्बीर बलोच की गुमशुदगी को एक दशक, परिवार और मानवाधिकार संगठन मांग रहे जवाब
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में छात्र नेता शब्बीर बलोच के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने की घटना को एक दशक हो गया है। इस मौके पर कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों और छात्र संगठनों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से उनके बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ)-आजाद ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है।

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संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) और जबरन गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप (WGEID) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में वैश्विक समुदाय से आग्रह किया गया है कि वे पाकिस्तानी अधिकारियों पर शब्बीर बलोच और अन्य सभी राजनीतिक कैदियों को "यातना केंद्रों" से सुरक्षित रिहा कराने के लिए दबाव डालें।

घटना और परिवार का संघर्ष

बीएसओ-आजाद के पूर्व सूचना सचिव, शब्बीर बलोच को 4 अक्टूबर 2016 को बलूचिस्तान के केच जिले के ग्वारकोप इलाके से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उनकी पत्नी जरीना बलोच के सामने से जबरन उठा लिया था। संगठन के अनुसार, तब से शब्बीर के परिवार को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और उनकी बहन और पत्नी लगातार उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए संघर्ष कर रही हैं।

व्यापक मानवाधिकारों का मुद्दा

पत्र में बलूचिस्तान में व्यापक स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया, "दुनिया के लोगों, पाकिस्तानी सरकार ने बलूचों पर बेरहमी जारी रखी है। इसमें बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत लाखों लोगों की हत्या की गई है... पाकिस्तानी सेना कई सैन्य अभियान और नरसंहार करती रही है।" पत्र में यह भी दावा किया गया कि छात्रों, शिक्षकों, डॉक्टरों, वकीलों और पत्रकारों सहित लाखों लोगों को जबरन गायब किया गया है।

अन्य संगठनों की मांग

शब्बीर बलोच की गुमशुदगी के मामले में अन्य मानवाधिकार संस्थाओं ने भी अपनी आवाज़ उठाई है। बलूचिस्तान की मानवाधिकार परिषद (HRCB) ने चिंता जताते हुए कहा, "पिछले एक दशक में, उनके परिवार ने हर उपलब्ध कानूनी रास्ता अपनाया है, फिर भी अधिकारी उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी देने में नाकाम रहे हैं।" वहीं, बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने अधिकारियों से शब्बीर के ठिकाने का खुलासा करने और उनके परिवार को "सच, न्याय और जवाबदेही" देने का आग्रह किया है।

इनपुट: IANS

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