बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े, अवामी लीग ने BNP सरकार को सुरक्षा में नाकामी का दोषी ठहराया
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर सत्तारूढ़ अवामी लीग ने विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पर निशाना साधा है। अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि देश…
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर सत्तारूढ़ अवामी लीग ने विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पर निशाना साधा है। अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि देश में जब भी राजनीतिक उथल-पुथल होती है, हिंदू परिवारों को बार-बार निशाना बनाया जाता है और BNP उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अवामी लीग ने भोला जिले के लालमोहन उपजिला में हुई एक ताजा घटना का हवाला दिया है। यहां भूमि विवाद में अदालत का फैसला पक्ष में आने के बावजूद गोपाल कृष्ण दास और उनके परिवार पर क्रूरता से हमला किया गया। पार्टी ने कहा कि हमलावरों ने दिनदहाड़े घर में घुसकर गोपाल कृष्ण दास और उनकी पत्नी अखी रानी दास की बेरहमी से पिटाई की, उनकी दो बेटियों के साथ मारपीट और उत्पीड़न किया, और परिवार के बुजुर्ग पिता को पानी में डुबोकर प्रताड़ित किया।
चिंताजनक आंकड़े और पुराने आरोप
अवामी लीग ने कहा कि दास के घर में तोड़फोड़ और लूटपाट की यह घटना आम नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जब-जब BNP, जमात-ए-इस्लामी और उनसे जुड़े समूहों का प्रभाव रहा है, तब-तब बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को असुरक्षा और हिंसा झेलनी पड़ी है। पार्टी ने 2001 के चुनाव के बाद अल्पसंख्यकों पर हुए व्यापक हमलों की याद भी दिलाई।
इस बीच, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने भी सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है, जो देश में सांप्रदायिक हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के पहले छह महीनों में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 257 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 44 लोगों की मौत हो गई।
हिंसा की विभिन्न घटनाएं
काउंसिल की रिपोर्ट में इन आंकड़ों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 40 मामलों में 44 लोगों की जान गई। अल्पसंख्यकों पर हमले, जान से मारने की धमकी और शारीरिक उत्पीड़न के 42 मामले सामने आए। इसके अलावा, पूजा स्थलों पर तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की 62 घटनाएं, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमले की 47 घटनाएं, और धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे या कब्जे के प्रयास के 15 मामले भी दर्ज किए गए।
इनपुट: IANS



