कश्मीर पर नॉर्वे-पाकिस्तान की चर्चा के बाद भारत का कड़ा जवाब, PoK में हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देने की अपील
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य अंग बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे अत्याचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। यह…
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य अंग बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे अत्याचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। यह प्रतिक्रिया नॉर्वे और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच कश्मीर मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद आई है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारत का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, "पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। जिन मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता करनी चाहिए, वे हैं पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में अभी हो रहे अत्याचार और पीओके का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद के लिए किया जा रहा है।"
क्यों आया भारत का यह बयान?
दरअसल, गुरुवार को इस्लामाबाद में नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इशाक डार के बीच एक बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। इसी संदर्भ में भारत ने अपनी स्थिति दोहराई है।
PoK में मौजूदा हालात
वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। स्थानीय लोग और पाकिस्तानी सरकार के बीच दशकों का सबसे बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है, जिसमें हिंसक झड़पें, इंटरनेट पर पाबंदी और पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं। यह विरोध प्रदर्शन शुरुआत में बिजली और अन्य जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब यह राजनीतिक सुधार और बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करने वाले एक बड़े आंदोलन में बदल चुका है।
बांग्लादेश को डीज़ल सप्लाई
इसी ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को डीजल आपूर्ति के मुद्दे पर भी जानकारी दी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश को डीजल सप्लाई की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, ढाका की तरफ से और अधिक सप्लाई की अपील पर कोई भी फैसला भारत अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और देश में डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखकर ही करेगा।
इनपुट: IANS



