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असम में ‘स्विफ्ट’ परियोजना: 796 करोड़ से बदलेगी 71 ‘बील’ की तस्वीर, मछली उत्पादन और रोज़गार पर ज़ोर

असम सरकार ने राज्य के पारंपरिक जल निकायों, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बील’ कहा जाता है, को एक नई ज़िंदगी देने के लिए एक बड़ी पहल की है। लगभग 797 करोड़ रुपये की लागत वाली 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट' (SWIFT)…

असम में ‘स्विफ्ट’ परियोजना: 796 करोड़ से बदलेगी 71 ‘बील’ की तस्वीर, मछली उत्पादन और रोज़गार पर ज़ोर
(फोटो: IANS)

असम सरकार ने राज्य के पारंपरिक जल निकायों, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बील’ कहा जाता है, को एक नई ज़िंदगी देने के लिए एक बड़ी पहल की है। लगभग 797 करोड़ रुपये की लागत वाली 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट' (SWIFT) नाम की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के स्थायी अवसर तैयार करना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह परियोजना एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के सहयोग से चलाई जा रही है।

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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि असम की 'बीलों' (आर्द्रभूमि या वेटलैंड्स) की कहानी "हमारे लोगों की कहानी से अलग नहीं है"। उन्होंने राज्य की आर्द्रभूमियों को पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

परियोजना का दायरा और लक्ष्य

इस परियोजना के तहत राज्य के 23 जिलों में फैली 71 बीलों को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लगभग 4,000 हेक्टेयर जल क्षेत्र का कायाकल्प होगा। सरकार का अनुमान है कि इस प्रयास से 6,000 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होगा। मछली उत्पादन को और बढ़ावा देने के लिए सालाना करीब 570 मिलियन मछली के बच्चे (बीज) तैयार करने की भी योजना है।

स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ

प्रोजेक्ट स्विफ्ट का एक बड़ा फोकस मछली पालन और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों पर निर्भर समुदायों को सीधे तौर पर सशक्त बनाना है। इसके लिए सरकार लाभार्थियों को 302 नावें और मछली पकड़ने के जाल मुहैया कराएगी। साथ ही, मछली पालन के क्षेत्र में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए 1,000 युवाओं को 50,000 रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा।

इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और आय के अतिरिक्त अवसर पैदा करने के लिए स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा संचालित 30 मछली चारा इकाइयां और 100 मछली प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी। राज्य सरकार इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का एक मिला-जुला प्रयास मानती है, जिससे असम की प्राकृतिक संपदा भी बची रहे और उस पर निर्भर लोगों को भी सहारा मिले।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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