असम में बाढ़ का संकट गहराया, मुख्यमंत्री सरमा बोले- असल स्थिति आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा गंभीर
असम में बाढ़ की स्थिति आधिकारिक तौर पर बताए गए आकलन से कहीं अधिक गंभीर है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि कई गांव अभी भी पूरी तरह से बाहरी दुनिया से…
असम में बाढ़ की स्थिति आधिकारिक तौर पर बताए गए आकलन से कहीं अधिक गंभीर है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि कई गांव अभी भी पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं और हजारों लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चाराइदेव जिले के सोनारी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस आपदा की भयावहता को स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित इलाकों में लगातार शव बरामद हो रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि नुकसान का वास्तविक दायरा अब तक दर्ज किए गए आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा, "पूरे गांव जलमग्न हैं और कुछ ऐसे स्थान हैं जहां न तो सरकार और न ही राहत एजेंसियां पहुंच पाई हैं।"
राहत और बचाव के प्रयास
मुख्यमंत्री सरमा ने आश्वासन दिया कि वे स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राज्य प्रशासन मिलकर बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दुर्गम स्थानों और खराब मौसम के कारण बचाव दल सभी जगहों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया, "दुर्गम स्थानों के कारण एक मरीज को वहां से निकाला नहीं जा सका और उसे बैटरी से चलने वाले रिक्शा में रखना पड़ा।" मुख्यमंत्री के मुताबिक, हेलीकॉप्टर से हवाई अभियान चलाने के प्रयास भी मौसम और इलाके की कठिन परिस्थितियों के कारण सीमित रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा और सरकारी मदद
बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "कई परिवारों ने बाढ़ में अपने घर, पशुधन, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक सामान खो दिए हैं। पीड़ा की कोई सीमा नहीं है।" उन्होंने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी और हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने इस आपदा के अप्रत्याशित होने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने की घटना के तुरंत बाद वहां के प्रशासन ने असम सरकार को सूचित कर दिया था, लेकिन आपदा की अचानक प्रकृति के कारण निवारक कार्रवाई के लिए बहुत कम समय मिल पाया।
इनपुट: IANS



