असम में निजी विश्वविद्यालय खोलना होगा आसान, सरकार ने उच्च शिक्षा में निवेश बढ़ाने के लिए नियमों में किए बदलाव
असम में अब निजी विश्वविद्यालय स्थापित करना पहले से ज़्यादा आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियमों में कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंज़ूरी
असम में अब निजी विश्वविद्यालय स्थापित करना पहले से ज़्यादा आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियमों में कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंज़ूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों का लक्ष्य प्रतिष्ठित निजी संस्थानों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "असम की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए हमारा लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुंच का विस्तार करना है और हम इस दिशा में प्रतिष्ठित निजी संस्थानों के साथ साझेदारी करने के इच्छुक हैं। असम कैबिनेट ने अब उन लोगों के लिए इस प्राथमिकता वाले सेक्टर का हिस्सा बनना आसान बना दिया है, जो इसमें दिलचस्पी रखते हैं।"
क्या बदलाव किए गए हैं?
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम ज़मीन की ज़रूरत को तर्कसंगत बनाया गया है। इसके अलावा, आवश्यक एंडोमेंट फंड की सीमा भी घटाई गई है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से एक मज़बूत उच्च शिक्षा इकोसिस्टम का निर्माण होगा, जिससे छात्रों के लिए बेहतर अवसर पैदा होंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नीति में ये बदलाव अकादमिक मानकों से समझौता किए बिना भरोसेमंद संस्थानों को आकर्षित करने के लिए किए गए हैं। उम्मीद है कि नियमों में ढील से प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी और राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए विश्वविद्यालय खुलेंगे।
सुधारों का बड़ा लक्ष्य
यह पहल असम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य के मानव संसाधन को मज़बूत करना और अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों के हिसाब से एक कुशल कार्यबल तैयार करना है। सरकार को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से सरकारी निवेश को भी बल मिलेगा और छात्रों को अकादमिक पाठ्यक्रमों व शोध के ज़्यादा अवसर मिलेंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि पारदर्शी नियमों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। ये सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप भी हैं, जो बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के साथ सहयोग पर ज़ोर देती है।
इनपुट: IANS



