असम: एक ही जिले में दो बड़ी कार्रवाइयों में ₹68 करोड़ से ज़्यादा की नशीली गोलियाँ ज़ब्त, दो तस्कर गिरफ़्तार
असम के कछार जिले में सुरक्षा बलों ने नशीले पदार्थों के तस्करों पर बड़ी चोट की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दो अलग-अलग अभियानों में अधिकारियों ने 68 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की प्रतिबंधि…
असम के कछार जिले में सुरक्षा बलों ने नशीले पदार्थों के तस्करों पर बड़ी चोट की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दो अलग-अलग अभियानों में अधिकारियों ने 68 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की प्रतिबंधित मेथामफेटामाइन टैबलेट्स ज़ब्त की हैं और दो संदिग्ध तस्करों को गिरफ़्तार किया है। यह कार्रवाई अंतर-राज्यीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
इनमें से पहली कार्रवाई असम राइफल्स, कस्टम विभाग और असम पुलिस की एक संयुक्त टीम ने मंगलवार रात को की। टीम ने कछार जिले के लालपानी के पास एक ट्रक को रोका। ट्रक के ड्राइवर ने अँधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया।
पहली कार्रवाई: ₹45 करोड़ की ज़ब्ती
ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें से लगभग 1,50,000 मेथामफेटामाइन टैबलेट्स बरामद हुईं, जिनकी बाज़ार में अनुमानित कीमत 45 करोड़ रुपये बताई गई है। इस ऑपरेशन के दौरान एक टाटा ट्रक और एक मोबाइल हैंडसेट भी ज़ब्त किया गया। गिरफ़्तार किए गए ड्राइवर और ज़ब्त किए गए सामान को आगे की जाँच और कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम विभाग को सौंप दिया गया है। यह कार्रवाई नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत की गई है।
दूसरी कार्रवाई: लखीपुर में 2,30,000 टैबलेट्स बरामद
दूसरा अभियान असम पुलिस ने एक विशेष सूचना के आधार पर चलाया। पुलिस ने कछार जिले के लखीपुर थाना क्षेत्र के शिवपुर में एक ट्रक को रोका। इस कार्रवाई में लगभग 25 किलोग्राम वज़न की 2,30,000 मेथामफेटामाइन टैबलेट्स बरामद की गईं। पुलिस ने ट्रक के ड्राइवर साहिर हुसैन चौधरी को भी गिरफ़्तार कर लिया, जो कछार जिले का ही रहने वाला बताया जाता है।
म्यांमार से तस्करी का संदेह
मेथामफेटामाइन टैबलेट्स को 'याबा' या 'पार्टी टैबलेट' के नाम से भी जाना जाता है और इनका भारत, बांग्लादेश व पड़ोसी देशों में नशे के लिए इस्तेमाल होता है। पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि भारत में प्रतिबंधित इन नशीली दवाओं की तस्करी म्यांमार से की गई थी। म्यांमार की 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा भारत के चार पूर्वोत्तर राज्यों से लगती है और इसका बड़ा हिस्सा बिना बाड़ का है, जिससे यह इलाका हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसी नशीली दवाओं की तस्करी के लिए संवेदनशील बन गया है।
इनपुट: IANS



