रविवार, 27 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ब्रिक्स में क्यों बढ़ रही है आसियान देशों की दिलचस्पी? आर्थिक और कूटनीतिक कारण

वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (आसियान) का ब्रिक्स समूह की ओर झुकाव बढ़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए…

ब्रिक्स में क्यों बढ़ रही है आसियान देशों की दिलचस्पी? आर्थिक और कूटनीतिक कारण
(फोटो: IANS)

वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (आसियान) का ब्रिक्स समूह की ओर झुकाव बढ़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारियों में विविधता लाने के लिए ब्रिक्स को एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देख रहे हैं।

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यह रुझान 'पश्चिम बनाम बाकी दुनिया' की पारंपरिक खेमेबंदी से बचते हुए अपने हितों को साधने की एक व्यापक कोशिश का हिस्सा है। आसियान देश पारंपरिक रूप से खुद को छोटी और मध्यम शक्तियों का एक क्षेत्रीय मंच मानते हैं, जो दबाव के बजाय आपसी सलाह और सहयोग पर जोर देता है। अब वे ब्रिक्स को एक ऐसे अवसर के तौर पर देख रहे हैं, जहाँ वे अपनी इसी नीति को आगे बढ़ा सकते हैं।

भारत की अध्यक्षता में शिखर सम्मेलन और आसियान

भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था, जिसकी थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थी। इस सम्मेलन के बाद आसियान देशों के बीच समूह की बढ़ती प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान गया है। सम्मेलन का मुख्य फोकस राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करना था।

आसियान अध्यक्ष के रूप में शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा था कि आसियान देश शांति, समावेशी विकास और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स के साथ मिलकर काम करेंगे।

विभिन्न देशों के लिए ब्रिक्स के मायने

फिलीपींस: रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ संप्रभुता विवाद के बीच फिलीपींस के लिए ब्रिक्स एक अतिरिक्त मंच प्रदान करता है। इसके जरिए मनीला, बीजिंग के साथ सीधे टकराव में आए बिना अपने कूटनीतिक विकल्पों का विस्तार कर सकता है। शिखर सम्मेलन में भारत और फिलीपींस ने रक्षा, व्यापार और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा की।

वियतनाम: भारत में वियतनामी राजदूत के अनुसार, हनोई ब्रिक्स को आसियान से परे एक ऐसा मंच मानता है, जो उसे बाजारों और भागीदारों में विविधता लाने का अवसर देगा। वियतनाम का लक्ष्य ब्रिक्स की सफलता में योगदान देना है ताकि विकासशील देशों की आवाज को और मजबूती मिल सके। 2025 में ब्रिक्स का भागीदार देश बना वियतनाम, चीन, अमेरिका, जापान और यूरोप के साथ संबंध बनाए रखते हुए नए साझेदार बनाना चाहता है।

मलेशिया और इंडोनेशिया: मलेशिया, जो कि एक और भागीदार देश है, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रमुख उभरते बाजारों से जुड़ने के लिए ब्रिक्स को एक अहम रास्ते के तौर पर देख रहा है। वहीं, इंडोनेशिया (ब्रिक्स का एकमात्र आसियान सदस्य) इस समूह को 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को बुलंद करने और एक लचीली वैश्विक व्यापार प्रणाली को बढ़ावा देने का मंच मानता है।

भारत के लिए अवसर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिक्स में आसियान की बढ़ती रुचि भारत के लिए इन देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का अवसर पैदा करती है। भारत की मौजूदगी यह सुनिश्चित करने में भी मदद कर सकती है कि ब्रिक्स किसी एक शक्ति के प्रभुत्व वाला गुट न बनकर, व्यापक 'ग्लोबल साउथ' सहयोग का एक मंच बना रहे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और आसियान देश रणनीतिक स्वायत्तता और विविधीकरण जैसे मुद्दों पर एक साझा दृष्टिकोण रखते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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