पेपर लीक बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस: NTA भंग करने की मांग, प्रदर्शनकारियों की भाषा पर भी उठे सवाल
नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए लाए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' पर गुरुवार को राज्यसभा में गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान विपक्षी दलों ने नेशनल…
नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए लाए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' पर गुरुवार को राज्यसभा में गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान विपक्षी दलों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए और व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष के सहयोगी दल ने प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की जा रही भाषा पर चिंता व्यक्त की।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चर्चा के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सदस्य प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने सभी को परेशान किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा करने की अपील करते हुए इसे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला बताया। पटेल ने कहा कि इस विधेयक को सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती और देश को आगे ले जाने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।
विपक्ष का NTA पर हमला
बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने एक सुर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कड़ी आलोचना की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए NTA को ही खत्म करने की मांग कर दी। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस मामले में पहल करने का आग्रह किया।
मनोज झा ने शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के साथ हुई अपनी एक बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि कैसे ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) के उम्मीदवारों को 53-54 साल की उम्र में भी फिर से परीक्षा देनी पड़ती है, जबकि कुलपति बिना किसी ऐसी परीक्षा के विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करते रहते हैं।
छात्रों पर बल प्रयोग और आत्महत्या का मुद्दा
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने पिछले 10 वर्षों में आत्महत्या करने वाले 1.23 लाख छात्रों को श्रद्धांजलि देते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों में लंबित मामलों के भारी बोझ और शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं की कमी पर भी ध्यान दिलाया।
सिंह ने दिल्ली और बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुए अत्यधिक बल प्रयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस ने छात्रों पर एके-47 राइफल से गोली चलाई और केंद्र सरकार पर "आतंकवादियों जैसा व्यवहार" करने का आरोप लगाया। वहीं, प्रफुल्ल पटेल ने भी विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन करते हुए प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए और युवाओं को सही मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इनपुट: IANS



