आंध्र प्रदेश: अब AI करेगा जन-शिकायतों का निपटारा, चैटबॉट से दर्ज हुईं 23,000 से ज़्यादा अर्जियां
आंध्र प्रदेश सरकार ने जन-शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक नई प्रणाली शुरू की है। इस सिस्टम की मदद से अब तक 23,100 से अधिक…
आंध्र प्रदेश सरकार ने जन-शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक नई प्रणाली शुरू की है। इस सिस्टम की मदद से अब तक 23,100 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे शिकायतों को दर्ज करने, उन पर नजर रखने और उनके समाधान में अधिक कुशलता आने की उम्मीद है।
आईटी और रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) विभाग के सचिव भास्कर कटमनेनी ने एक समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि यह एआई-आधारित पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (PGRS) नागरिकों को अपने मोबाइल फोन से सीधे चैटबॉट के माध्यम से शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति जानने की सुविधा देता है।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर
यह नई प्रणाली जिलों और मंडलों में शिकायतों की स्थिति का विश्लेषण करेगी। यह उन क्षेत्रों की भी पहचान करेगी जहां बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित हैं। भास्कर कटमनेनी के मुताबिक, इससे जिला कलेक्टरों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह सिस्टम शिकायतों के समाधान के बाद नागरिकों से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को भी स्वचालित बना देगा, जिससे प्रशासन समाधान की गुणवत्ता का आकलन कर सकेगा।
चार जिले बने रोल मॉडल
शिकायतों के निपटारे में कुछ जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कटमनेनी ने नेल्लोर, नंड्याल, कृष्णा और श्रीसत्य साई जिलों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों की सराहना करते हुए उन्हें रोल मॉडल बताया। 8वें जिला कलेक्टर सम्मेलन के दूसरे दिन, उन्होंने डेटा-आधारित गवर्नेंस पर एक प्रेजेंटेशन भी दिया और अधिकारियों से आरटीजीएस के 'अवेयर' ऐप और वेबसाइट का उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि 'अवेयर' प्लेटफॉर्म पर मौसम, बीमारियों की तीव्रता और अन्य गतिविधियों से जुड़ी रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध है, लेकिन जिलों में इसका उपयोग अभी सीमित है। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम स्तर से लेकर जिला कलेक्टर तक सभी अधिकारी इसका इस्तेमाल करें। इससे फील्ड-स्तर के अधिकारियों को अपने क्षेत्र में मौसम की स्थिति, जल संसाधनों की उपलब्धता और बीमारियों के प्रसार को समझने में मदद मिलेगी, जिससे वे अधिक कुशलता से काम कर सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जीईएनसीओ और फायर सर्विसेज जैसे विभाग पहले से ही 'अवेयर' का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



