मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: धान खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए AI की मदद, 4 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान की खरीद को और पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने के लिए गुजरात सरकार ने एक नई पहल की है। राज्य में अब इस प्रक्रिया के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक…

गुजरात: धान खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए AI की मदद, 4 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू
(फोटो: IANS)

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान की खरीद को और पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने के लिए गुजरात सरकार ने एक नई पहल की है। राज्य में अब इस प्रक्रिया के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि अनाज की गुणवत्ता जांचने में मानवीय हस्तक्षेप कम हो और एकरूपता आए।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के दौरान इस तकनीक का परीक्षण करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया। इसके तहत चार जिलों—अहमदाबाद, महिसागर, आणंद और पंचमहल—के 10 खरीद केंद्रों पर AI-आधारित ग्रेन एनालाइजर मशीनें स्थापित की गईं।

प्रोजेक्ट के शुरुआती नतीजे

इस पायलट प्रोजेक्ट में कुल 13,334 किसानों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 6,191 धान के नमूनों का परीक्षण AI तकनीक के माध्यम से किया गया। जांच के बाद 3,379 नमूने (54.6%) ग्रेड-ए श्रेणी के पाए गए, जबकि 2,812 नमूने (45.4%) कॉमन ग्रेड के निकले।

कुल 341 नमूनों को मानकों पर खरा न उतरने के कारण खारिज कर दिया गया। सबसे अधिक 24% नमूने ढोलका केंद्र पर खारिज हुए, जबकि वीरमगाम केंद्र पर एक भी नमूना अस्वीकृत नहीं हुआ। पंजीकरण के मामले में आणंद जिले का खंभात केंद्र 2,663 किसानों के साथ सबसे आगे रहा।

कैसे काम करती है AI तकनीक?

AI ग्रेन एनालाइजर मशीनें धान के नमूनों की गहराई से जांच करती हैं। यह मशीन बाहरी अशुद्धियों, क्षतिग्रस्त या बदरंग दानों, अविकसित दानों, अन्य अनाजों की मिलावट और नमी की मात्रा जैसे कई मानकों को सटीकता से परखती है। इस प्रणाली को चलाने के लिए हर केंद्र पर निरंतर बिजली आपूर्ति और एक ऑपरेटर की आवश्यकता होती है। यह मौजूदा थर्ड-पार्टी ग्रेडिंग व्यवस्था से अलग है, जिसमें दो कर्मचारियों की जरूरत होती है।

राज्य में MSP पर खरीद की व्यवस्था

गुजरात में नागरिक आपूर्ति निगम नोडल एजेंसी है, जो बाजार भाव MSP से नीचे जाने पर किसानों से गेहूं, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलें खरीदती है। निगम का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वच्छ और मिलावट रहित अनाज मिले, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता बढ़े।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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