गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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AI से इंसान के अहंकार को चौथी बड़ी चुनौती मिल सकती है: स्वामी सर्वप्रियानंद

न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर एक अहम दार्शनिक सवाल उठाया है। उनके अनुसार, AI मानवता के खुद को श्रेष्ठ समझने के अहंकार के लिए चौथी बड़ी…

AI से इंसान के अहंकार को चौथी बड़ी चुनौती मिल सकती है: स्वामी सर्वप्रियानंद
(फोटो: IANS)

न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर एक अहम दार्शनिक सवाल उठाया है। उनके अनुसार, AI मानवता के खुद को श्रेष्ठ समझने के अहंकार के लिए चौथी बड़ी चुनौती बन सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित होती मशीनों के इस दौर में हमें यह फिर से सोचना होगा कि इंसान को आखिर क्या चीज विशिष्ट बनाती है।

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स्वामी सर्वप्रियानंद, जो एक प्रसिद्ध वेदांत विद्वान भी हैं, हाल ही में AI कंपनी एंथ्रोपिक के शोधकर्ताओं के साथ चेतना से जुड़े सवालों पर चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि AI से जुड़े सवाल सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये चेतना, पहचान और मानव जीवन के उद्देश्य जैसे गहरे विषयों तक जाते हैं।

AI के साथ कैसा व्यवहार?

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्नत AI सिस्टम को एक व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, तो स्वामी सर्वप्रियानंद का जवाब 'हाँ भी और नहीं भी' था। उन्होंने कहा, “एआई के साथ एक व्यक्ति की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं है कि तकनीक में इंसानों जैसी आध्यात्मिक जागरूकता या चेतना मौजूद है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे AI सिस्टम अधिक विकसित होंगे, समाज उनके साथ व्यक्तिगत संबंधों जैसा व्यवहार करने लग सकता है, भले ही चेतना का मूल सवाल अनसुलझा रहे।

विज्ञान से मिली पिछली चुनौतियां

मनोविश्लेषक सिगमंड फ्रायड के विचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे विज्ञान ने बार-बार इंसान के ब्रह्मांड के केंद्र में होने की धारणा को चुनौती दी है। स्वामी सर्वप्रियानंद के अनुसार, AI इस क्रम में चौथी बड़ी चुनौती हो सकती है। उन्होंने कहा, “हम सोचते थे कि रचनात्मक बुद्धिमत्ता केवल हमारे पास है। अब हम देखते हैं कि एआई महानतम मानव मस्तिष्क की तरह काम कर सकता है, बल्कि उससे बेहतर भी कर सकता है।”

AI शोधकर्ताओं की चिंता

अपनी चर्चा में, स्वामी सर्वप्रियानंद ने एंथ्रोपिक के शोधकर्ताओं के साथ हुई बातचीत का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में बड़ी सफलता के बावजूद, कई शोधकर्ता अपनी बनाई तकनीक के संभावित प्रभावों को लेकर गहरी चिंता में हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं की 'पर्सोना ड्रिफ्ट' जैसी घटनाओं में बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया। यह वह स्थिति है जिसमें किसी खास भूमिका या पहचान को अपनाने पर AI के तर्क करने और जवाब देने के तरीके में अप्रत्याशित बदलाव आ सकता है।

इनपुट: IANS

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