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बांग्लादेश: दुर्गा पूजा से पहले हिंदू परिवार की हत्या पर उठे सवाल, अवामी लीग ने सुरक्षा पर चिंता जताई

बांग्लादेश में आगामी दुर्गा पूजा उत्सव से ठीक पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दल अवामी लीग ने एक…

बांग्लादेश: दुर्गा पूजा से पहले हिंदू परिवार की हत्या पर उठे सवाल, अवामी लीग ने सुरक्षा पर चिंता जताई
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश में आगामी दुर्गा पूजा उत्सव से ठीक पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दल अवामी लीग ने एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में जांच की धीमी गति पर सवाल उठाते हुए सत्तारूढ़ बीएनपी सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि भय और असुरक्षा के ऐसे माहौल में उत्सव मनाना मुश्किल है।

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यह चिंता अगस्त में रंगपुर शहर में हुई एक दर्दनाक घटना से और बढ़ गई है, जहां सेवानिवृत्त शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई थी। अवामी लीग ने कहा कि डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिससे लोगों में डर का माहौल है। पार्टी ने बताया कि पुलिस के आश्वासन के बावजूद, डीएनए जांच और घटनास्थल से जुटाए गए 35 अन्य सबूतों की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।

जांच पर उठते सवाल

अवामी लीग ने जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि स्थानीय लोग पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि पीड़ित परिवार के रिश्तेदार भी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि केवल दो लोग परिवार के चार सदस्यों की गला घोंटकर हत्या कर सकते थे। पार्टी ने कहा, "अगर मामला सुलझ गया है तो लोग अब भी डरे हुए क्यों हैं, और अगर नहीं सुलझा है तो डेढ़ महीने बाद भी एक भी लैब रिपोर्ट क्यों नहीं आई?"

उत्सव पर डर का साया

पार्टी के अनुसार, इस खौफ का असर दुर्गा पूजा की तैयारियों पर भी साफ दिख रहा है। मंदिरों में सजावट नहीं हो रही है और बच्चों ने त्योहार के लिए नए कपड़े तक नहीं खरीदे हैं। एक बुजुर्ग महिला के हवाले से कहा गया, "भगवान ही जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है।" अवामी लीग ने कहा कि ऐसे में उत्सव की बात करना लोगों को भरोसा नहीं देता, बल्कि यह "शर्म की बात है"।

एक स्थानीय हिंदू गृहिणी ने भी प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा न होने की बात कही। वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि शुरुआत में पुलिस और मीडिया की मौजूदगी तो थी, लेकिन अब सब चुप हो गए हैं और "यही खामोशी सबसे बड़े सवाल खड़े करती है।"

अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले

अवामी लीग ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि बीते छह महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के 44 लोगों की मौत, मंदिरों और घरों पर हमले और सैकड़ों कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं ने अल्पसंख्यकों में भय को और बढ़ा दिया है। पार्टी ने कहा, "प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के लिए समानता के वादों की असली परीक्षा यह है कि कमजोर और संवेदनशील नागरिकों के साथ जमीन पर क्या हो रहा है।" पार्टी के अनुसार, 2026 में भी बांग्लादेश के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और सरकार बदलने से उनकी आशंकाएं खत्म नहीं हुई हैं।

इनपुट: IANS

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