बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ISI की नई चाल: भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए मुखौटा संगठनों का जाल

भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) एक नई रणनीति अपना रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई अब कई गुप्त और कागजी संगठन बना…

ISI की नई चाल: भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए मुखौटा संगठनों का जाल
(फोटो: IANS)

भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) एक नई रणनीति अपना रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई अब कई गुप्त और कागजी संगठन बना रही है, जिनका मुख्य उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे बड़े आतंकी समूहों को हमलों की जिम्मेदारी से बचाना और उन्हें एक तरह का संरक्षण देना है।

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जांच में यह बात सामने आई है कि ये नए संगठन असल में मौजूद नहीं हैं, बल्कि ये पुराने और प्रतिबंधित आतंकी गुटों के ही मुखौटे हैं। उदाहरण के तौर पर, 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) को लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन के रूप में बनाया गया था, ताकि हर हमले के बाद लश्कर अपनी सीधी संलिप्तता से इनकार कर सके। इसी तरह, शहजाद भट्टी के नेटवर्क को छिपाने के लिए आईएसआई ने 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) नाम का एक काल्पनिक संगठन गढ़ा।

जांच एजेंसियों के लिए चुनौती

एक खुफिया ब्यूरो के अधिकारी ने बताया कि इन मुखौटा संगठनों को बनाने का एक बड़ा मकसद भारतीय जांच एजेंसियों के काम में बाधा डालना भी है। चूँकि इन नए नामों का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं होता और न ही वे गृह मंत्रालय द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित होते हैं, इसलिए भारतीय एजेंसियों के लिए इनकी जानकारी इंटरपोल जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से साझा करना मुश्किल हो जाता है। अधिकारी ने कहा, "अगर जांचकर्ता ऐसे संगठनों के पीछे छिपे मूल संगठन का शीघ्र पता लगा लेते हैं, तो दोषी को सजा दिलाना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर आकर्षित करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।"

कई नए नाम आए सामने

हाल के हफ्तों में कई ऐसे छद्म संगठन सक्रिय हुए हैं। TTH के अलावा, यूनाइटेड सिख ब्रदरहुड (USB), सिख टाइगर्स ऑफ खालिस्तान (STK), खालिस्तान आर्म्ड फोर्स (KAF), शेर-ए-पंजाब ब्रिगेड (SPB), पंजाब सॉवरेनिटी अलायंस (PSA) और खालिस्तान लिबरेशन आर्मी (KLA) जैसे नाम सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, ये सभी जैश-ए-मोहम्मद, बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और अन्य खालिस्तानी आतंकी समूहों के मुखौटे हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इन छद्म नामों और उनके असली आतंकी समूह के बीच संबंध स्थापित करने में समय लगता है। यह देरी मूल आतंकी संगठन को फिर से संगठित होने और अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने का मौका दे देती है। द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का उदाहरण देते हुए अधिकारी ने बताया कि एजेंसियों को यह पता लगाने में कई महीने लग गए कि यह लश्कर का ही एक मुखौटा है, जिसके बाद गृह मंत्रालय और हाल ही में अमेरिका ने भी इसे प्रतिबंधित किया। अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में भी ऐसे काल्पनिक संगठन बनाता रहेगा, जो भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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