TMC के 20 बागी सांसदों पर फैसला लटका, अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से की जल्द कार्रवाई की मांग
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक पत्र लिखा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बनर्जी ने अपने पत्र में इन याचिकाओं के शीघ्र निपटारे का आग्रह किया है।
यह मामला उन 20 सांसदों से जुड़ा है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन बाद में नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि इन सांसदों का यह कदम दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
कानूनी आधार और कार्रवाई में देरी
टीएमसी ने इन सांसदों की अयोग्यता के लिए संविधान की 10वीं अनुसूची और लोकसभा के 'दल-बदल के आधार पर अयोग्यता' नियम, 1985 के नियम 6 का हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है कि याचिकाओं के साथ विस्तृत तथ्यात्मक और कानूनी आधार भी प्रस्तुत किए गए थे। बनर्जी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि याचिकाएं दायर हुए पांच सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई सुनवाई हुई है और न ही कोई नोटिस जारी किया गया है।
पत्र के अनुसार, "इस तरह की निरंतर निष्क्रियता गंभीर चिंता का विषय है।" अभिषेक बनर्जी ने तर्क दिया कि दलबदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए स्पीकर को उचित समय के भीतर निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा इसका संवैधानिक उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
सर्वदलीय बैठक से बढ़ी चिंता
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने 19 जुलाई को हुई सर्वदलीय बैठक में इन 20 सांसदों को एक अलग समूह के रूप में आमंत्रित किया। बनर्जी ने अपने पत्र में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सांसदों की स्थिति को लेकर अनिश्चितता को बढ़ाता है और याचिकाओं पर तत्काल निर्णय की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे घटनाक्रम संसदीय कार्यवाही की अखंडता और 10वीं अनुसूची की प्रभावशीलता को कमजोर कर सकते हैं।
इनपुट: IANS



