पेपर लीक बिल पर अभिषेक बनर्जी का हमला: 'सिर्फ कानून बनाना नाकामी छिपाने के लिए काफी नहीं'
लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि केवल कानून…
लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि केवल कानून बना देने से सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मंगलवार को हुई इस बहस में बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन तो करती है, लेकिन इसे एनडीए सरकार की "विफलताओं का स्वीकार" मानती है।
उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी शासन विफल होता है तो कानून बदल दिया जाता है, प्रशासनिक व्यवस्था नाकाम होती है तो सजा बढ़ा दी जाती है, और जब संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं तो एक नई समिति बना दी जाती है। बनर्जी ने कहा, "शासन सुर्खियों से नहीं, बल्कि परिणामों से मापा जाता है।"
"यह बिल समाधान नहीं, विफलता का स्वीकार है"
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों, परीक्षाओं और योग्यता की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा, "अब जब यह विफलता पूरे देश के सामने उजागर हो गई है, तो सरकार यह विश्वास दिलाना चाहती है कि सिर्फ सजा बढ़ाने से 12 साल की नाकामी मिट जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर छात्र को निष्पक्ष परीक्षा का भरोसा मिलना चाहिए और हर अभिभावक को यह विश्वास होना चाहिए कि सफलता मेहनत और प्रतिभा से मिलेगी, न कि पैसे या आपराधिक गिरोहों के दम पर। बनर्जी ने चेतावनी दी, "अगर परीक्षा प्रणाली लगातार व्यवस्थागत विफलताओं की शिकार होती रही, तो कितना भी कड़ा कानून बना लें, करोड़ों छात्रों का टूटा विश्वास वापस नहीं आएगा।"
छात्रों के प्रदर्शन और सरकारी रवैये पर सवाल
नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए टीएमसी सांसद ने सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि न्याय मांगने वाले छात्रों की बात सुनने के बजाय सरकार ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
केंद्र पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "सरकार दावा करती है कि वह उपग्रहों पर नजर रख सकती है, मिसाइलों को ट्रैक कर सकती है और साइबर स्पेस की सुरक्षा कर सकती है, लेकिन गोपनीय परीक्षा प्रश्नपत्र उससे पहले लीक होकर पहुंच जाते हैं।"
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सरकार के रिपोर्ट कार्ड में सबसे ऊपर एक ही शब्द लिखेगी- "फेल"। उनके मुताबिक, सरकार परीक्षा प्रणाली, योग्यता, छात्रों के विश्वास और उनके सम्मान की रक्षा करने में नाकाम रही है।
इनपुट: IANS



