बांग्लादेश: नदियों में मिल रहे शव, क्या हत्या के सबूत मिटाने का ज़रिया बन रही हैं जलधाराएं?
बांग्लादेश में नदियां अपराधियों के लिए हत्या के सबूत मिटाने का एक आसान ज़रिया बनती जा रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 महीनों में देश भर की नदियों से 920 शव बरामद किए गए…
बांग्लादेश में नदियां अपराधियों के लिए हत्या के सबूत मिटाने का एक आसान ज़रिया बनती जा रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 महीनों में देश भर की नदियों से 920 शव बरामद किए गए हैं, जो कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अपराध विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस खतरनाक चलन पर गहरी चिंता जता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हत्या के बाद शव को वज़न के साथ नदी में फेंकने से अपराधियों को कानून की पकड़ से बचने के लिए काफी समय मिल जाता है। नदी की तेज धारा शव को अपराध स्थल से बहुत दूर बहा ले जाती है, जिससे पुलिस के लिए जांच करना और घटनास्थल का पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
चिंताजनक पुलिस आंकड़े
बांग्लादेश रिवर पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में नदियों से कुल 541 शव बरामद हुए थे। वहीं, इस साल यानी 2026 में जनवरी से अगस्त के बीच यह संख्या 379 रही। हालांकि, यह सिर्फ़ नदियों से मिले शवों का आंकड़ा है; सड़कों के किनारे और रेलवे ट्रैक के पास से भी अक्सर शव बरामद होते रहते हैं।
मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट
मानवाधिकार संगठन 'मानबाधिकार शोंस्कृति फाउंडेशन' (एमएसएफ) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 के पहले 20 दिनों में ही ढाका समेत विभिन्न इलाकों से कम से कम 42 अज्ञात शव बरामद किए गए। ये शव नदी किनारे, सड़कों, खेतों और रेलवे लाइनों जैसे स्थानों पर मिले। संगठन के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच कुल 465 अज्ञात शव बरामद हुए थे।
एमएसएफ के मुख्य कार्यकारी सैदुर रहमान ने कहा कि उनके विश्लेषण से पता चलता है कि बरामद किए गए ज़्यादातर पीड़ितों की हत्या किसी और जगह पर की गई और फिर शवों को नदियों में फेंक दिया गया। उन्होंने इस चलन को चिंताजनक बताते हुए कहा, "हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि कई पीड़ितों को ज़मीन, पारिवारिक, वित्तीय और राजनीतिक विवादों के चलते हत्या के बाद फेंका जा रहा है। अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज करने से राज्य अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही से मुक्त नहीं हो जाता।"
पहचान की चुनौती
शवों की पहचान करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। हाल ही में 14 सितंबर को बंशी नदी से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया था। धामराई थाने के निरीक्षक (जांच) शहीदुल इस्लाम ने बताया कि मृतक की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की टीम ने फिंगरप्रिंट से पहचान की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। बाद में डीएनए सैंपल लेने के बाद शव को अज्ञात के रूप में दफना दिया गया।
इनपुट: IANS



