शनिवार, 25 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक में सूखे का गंभीर संकट: 80% झीलें सूखीं, बुवाई ठप, सरकार ने पेयजल को दी प्राथमिकता

कर्नाटक इस साल सूखे की गंभीर चपेट में है, जहाँ राज्य की लगभग 80 प्रतिशत झीलें सूख चुकी हैं और जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभूतपूर्व संकट…

कर्नाटक में सूखे का गंभीर संकट: 80% झीलें सूखीं, बुवाई ठप, सरकार ने पेयजल को दी प्राथमिकता
(फोटो: IANS)

कर्नाटक इस साल सूखे की गंभीर चपेट में है, जहाँ राज्य की लगभग 80 प्रतिशत झीलें सूख चुकी हैं और जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभूतपूर्व संकट के बीच राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी और पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

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उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जलाशयों में उपलब्ध पानी का उपयोग केवल पीने के लिए आरक्षित किया जाएगा और कृषि कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह बात मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद एक समीक्षा बैठक में कही।

बारिश की भारी कमी और बुवाई पर असर

राज्य में अब तक 42 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है। जून में हुई असमान वर्षा के कारण किसानों द्वारा शुरू की गई बुवाई की प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। पूरे राज्य में सामान्य बुवाई का केवल 15 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। कुछ जिलों की स्थिति और भी खराब है, जैसे चिकबल्लापुर में केवल 2 प्रतिशत, कोलार में 1.5 से 2 प्रतिशत और चित्रदुर्ग में 3 से 4 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है।

बेंगलुरु राजस्व मंडल में औसतन 37 प्रतिशत वर्षा की कमी है। इसके विभिन्न जिलों में कमी इस प्रकार है: दावणगेरे और शिवमोग्गा में 48%, कोलार में 36%, और बेंगलुरु शहरी, चिक्कबल्लापुर व चित्रदुर्ग में 28-28%।

सुपर एल-नीनो बना वजह

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने इस सूखे के लिए 'सुपर एल-नीनो' को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर के सतही तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की असामान्य वृद्धि के कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने कहा, "पिछले 75 वर्षों में 25 बार एल-नीनो की स्थिति बनी, लेकिन इस बार यह अधिक गंभीर है।" उन्होंने यह भी बताया कि यह एक वैश्विक समस्या है, जिससे दुनिया का लगभग आधा हिस्सा, भारत के कई अन्य राज्य और यूरोप भी प्रभावित हैं।

सरकार के राहत-कार्य और योजनाएँ

पेयजल और चारा: सरकार जल संकट से निपटने के लिए निजी बोरवेल किराए पर ले रही है और टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रही है। प्रत्येक जिले को पेयजल व्यवस्था के लिए 5 करोड़ रुपये और हर विधानसभा क्षेत्र को 1 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। पशुओं के लिए चारे के संकट की आशंका को देखते हुए, सरकार ने कहा है कि फिलहाल 30-40 सप्ताह का चारा उपलब्ध है और किसानों को चारा उगाने के लिए बीज किट दी जा रही हैं।

पलायन और रोजगार: बागलकोट, विजयपुरा जैसे जिलों से लोगों के पलायन की खबरों के बाद, अधिकारियों को प्रभावित गांवों में सरकारी योजनाओं के तहत तुरंत रोजगार के अवसर पैदा करने का निर्देश दिया गया है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है।

केंद्र से मदद की अपील

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। परमेश्वर ने बताया कि केंद्र से सूखा घोषित करने के 10 मानकों में ढील देने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त से पहले केंद्र को सूखा ज्ञापन नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि यदि अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो स्थिति बदल सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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