शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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फास्ट ट्रैक कोर्ट: रेप और पॉक्सो के 2.45 लाख मामले लंबित, योजना की अवधि फिर बढ़ी

देश में दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए बनाई गईं फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) में अब भी करीब ढाई लाख मामले लंबित हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय…

फास्ट ट्रैक कोर्ट: रेप और पॉक्सो के 2.45 लाख मामले लंबित, योजना की अवधि फिर बढ़ी
(फोटो: IANS)

देश में दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए बनाई गईं फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) में अब भी करीब ढाई लाख मामले लंबित हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैलेंडर वर्ष 2024 के अंत तक इन विशेष अदालतों में 2.45 लाख मामले सुनवाई के लिए लंबित थे।

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इन अदालतों की स्थापना अक्टूबर 2019 में एक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य बलात्कार और बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाना था। फिलहाल देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रही हैं, जिनमें 398 विशेष ई-पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं।

मामलों के निपटारे की स्थिति

मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को बताया कि इन अदालतों ने वर्ष 2024 में 85,595 मामलों का निपटारा किया, जबकि 2023 में यह आँकड़ा 76,319 था। इसके बावजूद लंबित मामलों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। 31 दिसंबर 2024 तक 2.04 लाख और 31 दिसंबर 2023 तक 2.02 लाख मामले लंबित थे।

योजना का विस्तार और फंडिंग

लंबित मामलों के बोझ को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना को फिर से विस्तार दिया है। पहले इसे 31 मार्च, 2026 तक बढ़ाया गया था, जिसके तहत कुल 790 FTSC स्थापित करने का लक्ष्य था। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब इस योजना को अस्थायी रूप से 30 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

मेघवाल ने बताया कि FTSC योजना के लिए धनराशि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत जारी की जाती है। इसमें प्रत्येक अदालत के लिए एक न्यायिक अधिकारी, सात सहायक कर्मचारी और अन्य दैनिक खर्चों का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,259.51 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है ताकि अदालतों का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे। इसके अलावा, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल में राज्यों को 4,519.47 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता भी दी गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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