अफगानिस्तान में 3 महीने में 399 आम नागरिक हताहत, UN की रिपोर्ट ने पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार
संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में पिछले तीन महीनों में हुए आम नागरिकों के हताहत होने पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सीमा पार से हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार…
संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में पिछले तीन महीनों में हुए आम नागरिकों के हताहत होने पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सीमा पार से हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (यूनामा) ने मंगलवार को बताया कि 1 अप्रैल से 30 जून के बीच हुई इन घटनाओं में 57 अफगान नागरिकों की मौत हो गई और 342 अन्य घायल हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन हताहतों में बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। प्रभावित लोगों में 112 बच्चे (26 की मौत और 86 घायल) और 40 महिलाएं (6 की मौत और 34 घायल) थीं। यूनामा ने स्पष्ट किया है कि हवाई हमले और जमीनी गोलीबारी इन घटनाओं की मुख्य वजहें थीं।
प्रमुख घटनाएं और मानवाधिकार चिंताएं
यूनामा ने विशेष रूप से दो घटनाओं का जिक्र किया है। सबसे अधिक नागरिक हताहत 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए गए हवाई हमलों के कारण हुए। इसके अलावा, 27 से 29 अप्रैल के बीच कुनार प्रांत में हुई गोलाबारी में भी कई लोग प्रभावित हुए थे। इन घटनाओं के चलते पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी संदर्भ में, 15 जुलाई को अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने इन हमलों में संभावित युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। एचआरडब्ल्यू ने कहा, "सिर्फ नागरिकों के हताहत होने से यह साबित नहीं होता कि युद्ध के कानूनों का उल्लंघन हुआ है। लेकिन आम लोगों की मौत की खबरें इस बात की जरूरत जरूर दिखाती हैं कि हमला करने वाले और बचाव करने वाले, दोनों पक्षों की ओर से संभावित युद्ध अपराधों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।"
अंतरराष्ट्रीय कानून और जिम्मेदारी
ह्यूमन राइट्स वॉच ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हवाला देते हुए दोनों पक्षों की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। संगठन के अनुसार, हमलावर पक्ष को हमेशा आम नागरिकों और सैन्य ठिकानों में स्पष्ट रूप से अंतर करना चाहिए और हमले केवल सैन्य ठिकानों पर ही केंद्रित होने चाहिए। वहीं, बचाव करने वाले पक्ष का भी यह कर्तव्य है कि वह घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास सैन्य ठिकाने न बनाए ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। एचआरडब्ल्यू ने जोर दिया कि एक पक्ष द्वारा नियमों का उल्लंघन करने से दूसरे पक्ष की अपनी जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जातीं।
इनपुट: IANS



