गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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नेपाल पर मंडरा रहा हिमनदी झीलों का खतरा: 47 झीलें कभी भी ला सकती हैं विनाशकारी बाढ़

नेपाल में हिमालय की 47 हिमनदी झीलें (ग्लेशियल लेक) एक बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं, जिनके फटने से कभी भी विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल सेंटर फॉर…

नेपाल पर मंडरा रहा हिमनदी झीलों का खतरा: 47 झीलें कभी भी ला सकती हैं विनाशकारी बाढ़
(फोटो: IANS)

नेपाल में हिमालय की 47 हिमनदी झीलें (ग्लेशियल लेक) एक बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं, जिनके फटने से कभी भी विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिकों ने इन 47 झीलों को 'संभावित रूप से खतरनाक' के रूप में चिह्नित किया है। इनसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की चेतावनी जारी की गई है, जो नदी प्रणालियों के ज़रिए भारी तबाही मचा सकती है।

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इन खतरनाक झीलों में से 21 पूरी तरह से नेपाल के भीतर स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं जो सीमा पार की श्रेणी में आती हैं। ये तिब्बती झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्सों में हैं जो दक्षिण की ओर बहकर नेपाल में प्रवेश करती हैं। इस वजह से, ये झीलें भी नीचे बसे नेपाली समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए एक गंभीर और सीधा खतरा पैदा करती हैं।

सबसे ज़्यादा जोखिम वाली झीलें और क्षेत्र

आपदा प्रबंधन अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने कुछ विशेष झीलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता जताई है। ये पत्थर और मलबे (मोरेन) से बनी वो झीलें हैं जो तेज़ी से फैल रही हैं। इनके जलस्तर को कम करने और जोखिम घटाने के लिए तत्काल कार्रवाई की सिफ़ारिश की गई है। इनमें लोअर बरुण (टैलोपोखरी), थुलागी (डोना), लुमडिंग त्सो, होंगु-2/चामलांग साउथ, त्सो रोल्पा और इमजा त्सो झीलें प्रमुख हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय जोखिम का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पूर्वी और मध्य नेपाल के कोशी और बागमती नदी बेसिन में केंद्रित है।

किन जिलों पर है सबसे बड़ा खतरा?

यदि कोई बड़ी GLOF घटना होती है, तो कई पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में गंभीर नुकसान हो सकता है। सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में दूध कोसी और इमजा बेसिन वाला सोलुखुम्बु, और बरुण व अरुण नदी घाटियों वाला संखुवासभा शामिल है। इसी तरह, दोलखा जिले को त्सो रोल्पा झील से खतरा है, जबकि सिंधुपालचोक जिला तिब्बत की सीमा पार झीलों से आने वाली बाढ़ की चपेट में है।

इनके अलावा, रामेछाप, काव्रेपलानचोक और रसुवा जैसे जिलों की नदी किनारे की बस्तियां भी संवेदनशील मानी गई हैं। पश्चिमी और सुदूर-पश्चिमी नेपाल में गंडकी और कर्णाली नदी बेसिन के किनारे बसे समुदायों और जलविद्युत परियोजनाओं पर भी सीधा खतरा है। इसमें मनांग, लमजुंग, गोरखा, मुस्तांग, म्याग्दी और हुम्ला जैसे जिले शामिल हैं जो संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

इनपुट: IANS

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