बच्चों के बेहतर पोषण और शिक्षा के लिए देश के 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे 'सक्षम आंगनवाड़ी'
केंद्र सरकार ने देशभर में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के तौर पर अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है, ताकि बच्चों को बेहतर पोषण और शुरुआती देखभाल के साथ-साथ अच्छी शिक्षा भी मिल सके…
केंद्र सरकार ने देशभर में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के तौर पर अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है, ताकि बच्चों को बेहतर पोषण और शुरुआती देखभाल के साथ-साथ अच्छी शिक्षा भी मिल सके। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।
यह पहल 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' का हिस्सा है। इस व्यापक मिशन में आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरी बालिका योजना को एक साथ मिला दिया गया है, जिसका मुख्य लक्ष्य कुपोषण की चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।
कौन हैं लाभार्थी और क्या है मिशन का दायरा?
एक प्रश्न के जवाब में मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि यह मिशन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहां कुपोषण की दर अधिक है। इस योजना के तहत 6 साल तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां (14 से 18 वर्ष, विशेषकर आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर में) लाभार्थी के रूप में शामिल हैं।
'सक्षम आंगनवाड़ी' में क्या होगा खास?
इन 2 लाख उन्नत आंगनवाड़ी केंद्रों में पारंपरिक पोषण सेवाओं के अलावा आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें एलईडी स्क्रीन, पानी साफ करने की मशीनें, पोषण वाटिका (किचन गार्डन) और बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए विशेष सामग्री शामिल है। साथ ही, दीवारों पर 'बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड' (Bala) पेंटिंग्स भी बनाई जा रही हैं, जो सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को रोचक बनाती हैं।
पोषण मानकों में सुधार और निगरानी की व्यवस्था
सावित्री ठाकुर ने बताया कि लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2023 में पोषण के इन मानकों में संशोधन किया गया था। पहले जहां सिर्फ कैलोरी पर जोर था, वहीं अब नए मानक भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को ध्यान में रखकर संतुलित और विविध आहार पर केंद्रित हैं। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण भी मिलता है।
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए 'पोषण ट्रैकर' नामक एक डिजिटल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आईटी-आधारित प्रणाली आंगनवाड़ी केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों से जुड़ी गतिविधियों की लगभग रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करती है और सभी संबंधित आंकड़े इस पर उपलब्ध हैं।
योजना के सकारात्मक परिणाम
मंत्री ने बताया कि विभिन्न सर्वेक्षणों से यह पता चलता है कि मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से लड़ने में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। उन्होंने सूक्ष्म पोषक तत्वों के क्षेत्र में हुए सुधार का भी जिक्र किया और कहा कि 6 से 59 महीने के बच्चों में एनीमिया की दर में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी आई है, जो आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट और बेहतर पोषण कार्यक्रमों का नतीजा है।
इनपुट: IANS



