रविवार, 16 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, फाइनेंशियल और मेटल सेक्टर रहे सबसे आगे

भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही शानदार रही है। मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 19 सेक्टरों का प्रदर्शन बाज़ार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा, जिससे कंपनियों…

भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, फाइनेंशियल और मेटल सेक्टर रहे सबसे आगे
(फोटो: IANS)

भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही शानदार रही है। मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 19 सेक्टरों का प्रदर्शन बाज़ार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा, जिससे कंपनियों के मुनाफे में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। समाचार एजेंसी IANS द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस मजबूत प्रदर्शन की अगुवाई फाइनेंशियल, मेटल्स, ऑटोमोबाइल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को छोड़कर तेल और गैस सेक्टर ने की।

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रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही का नतीजों का सीजन मज़बूती के साथ खत्म हुआ। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) यूनिवर्स में शामिल कंपनियों की बिक्री में सालाना आधार पर 18%, EBITDA में 15% और टैक्स के बाद मुनाफे (PAT) में 22% की वृद्धि दर्ज की गई। यह ब्रोकरेज फर्म के क्रमशः 15%, 10% और 15% वृद्धि के अनुमान से कहीं ज़्यादा है।

किन सेक्टरों ने किया दमदार प्रदर्शन?

इस शानदार प्रदर्शन में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज़ और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। इनके अलावा मेटल्स, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों ने भी आय वृद्धि में सकारात्मक भूमिका निभाई। निफ्टी की बात करें तो टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना 18% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले 10 तिमाहियों में सबसे अधिक है और मोतीलाल ओसवाल के 10% के अनुमान से काफी बेहतर है।

कुछ सेक्टरों ने किया निराश

हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का खामियाजा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को भुगतना पड़ा, जो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली साबित हुईं। इन कंपनियों को कुल 181 अरब रुपए का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में उन्हें 162 अरब रुपए का मुनाफा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट सेक्टर और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) ने भी कुल कमाई के आंकड़ों पर नकारात्मक असर डाला।

सभी साइज़ की कंपनियों में मज़बूती

मार्केट कैप के हिसाब से देखें तो हर आकार की कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए। MOFSL यूनिवर्स की लार्ज-कैप कंपनियों की आय 21% बढ़ी (अनुमान 14% था)। मिड-कैप कंपनियों की आय में 23% की वृद्धि हुई, जो 11 तिमाहियों में सबसे ज़्यादा है। वहीं, स्मॉल-कैप कंपनियों की आय 31% बढ़ी, जबकि अनुमान 22% का था।

इनपुट: IANS

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