होर्मुज जलडमरूमध्य: 166 भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर विदेश मंत्रालय की नज़र
ईरान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने वहाँ मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस रणनीतिक रूप…
ईरान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने वहाँ मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में कुल 166 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा और कल्याण पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया, "फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में छह भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर 125 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में संचालित विदेशी जहाजों पर भी 41 भारतीय नाविक कार्यरत हैं।"
नाविकों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि पोत परिवहन मंत्रालय भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास भी संबंधित मंत्रालयों के साथ निरंतर संपर्क में हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।
यह निगरानी हाल ही में हुई एक घटना के बाद और कड़ी कर दी गई है। 24 जुलाई को, मोजाम्बिक के ध्वज वाले एलपीजी टैंकर 'दिशा' पर ईरानी जलक्षेत्र में हमला हुआ था, जिस पर 28 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। घटना के बाद ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की थी कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और वे अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।
पहले जारी की गई थी एडवाइजरी
इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए भारतीय समुद्री नियामक पहले ही एहतियाती कदम उठा चुका है। महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (DGMA) ने जहाज मालिकों और प्रबंधन कंपनियों को अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने का निर्देश दिया था। यह फैसला भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इनपुट: IANS



