राजस्थान: 15 साल के लंबे इंतज़ार और विवादों के बाद पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन के लिए तैयार, पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण
करीब 15 साल के लंबे सफर, राजनीतिक खींचतान और कई बड़ी चुनौतियों से गुजरने के बाद आखिरकार राजस्थान के बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी शुरू होने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को देश के इस
करीब 15 साल के लंबे सफर, राजनीतिक खींचतान और कई बड़ी चुनौतियों से गुजरने के बाद आखिरकार राजस्थान के बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी शुरू होने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को देश के इस पहले ग्रीनफील्ड BS-6 मानक वाले एकीकृत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का रास्ता आसान नहीं रहा और इसे पूरा होने में डेढ़ दशक का समय लग गया।
यह वही प्रोजेक्ट है जिसका दो बार शिलान्यास हुआ और उद्घाटन की तारीखें भी कई बार टल गईं। हाल ही में इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2026 को होना तय था, लेकिन ठीक एक दिन पहले 20 अप्रैल को एक यूनिट में रिसाव के बाद आग लगने की घटना के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था।
विवादों और चुनौतियों भरा सफर
यह मेगा प्रोजेक्ट शुरू से ही विवादों का केंद्र रहा है। सबसे पहला विवाद इसके स्थान को लेकर हुआ। शुरुआत में इसे मौजूदा बालोतरा जिले के बायतू क्षेत्र के लिलाला गांव में स्थापित करने का प्रस्ताव था। घोषणा के साथ ही कई प्रभावशाली लोगों ने वहां ज़मीनें खरीद लीं। लेकिन जब सरकार ने ज़मीन अधिग्रहण शुरू किया तो कुछ किसानों ने प्रति बीघा 1 करोड़ रुपए तक की मांग कर दी और विरोध बढ़ गया।
इस विरोध के बाद तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने रिफाइनरी को पचपदरा में स्थानांतरित करने का फैसला किया, जहाँ सरकारी जमीन उपलब्ध थी। इस फैसले ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। बायतू के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी अपनी ही सरकार के खिलाफ हो गए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा, "मैं अपनी जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा।" यह विवाद तब और बढ़ गया जब तत्कालीन राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इस्तीफा दे दिया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
परियोजना में हुई देरी और लागत वृद्धि को लेकर भी कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान काम पांच साल तक रुका रहा, जिससे लागत काफी बढ़ गई। उन्होंने इस परियोजना को राजस्थान के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसके भव्य सार्वजनिक उद्घाटन की वकालत की। उन्होंने कहा, “यह परियोजना राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है, इसलिए इसका सार्वजनिक रूप से भव्य उद्घाटन होना चाहिए।”
वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत ने पलटवार करते हुए कहा कि अशोक गहलोत के कार्यकाल में न तो जगह ठीक से तय हुई और न ही कोई ठोस वित्तीय ढांचा तैयार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए शिलान्यास किया गया था, जबकि प्रोजेक्ट साइट को अंतिम रूप और वित्तीय योजना 2016 में भाजपा सरकार ने दी थी।
देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरियों में से एक
यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें दोनों की हिस्सेदारी क्रमशः 74% और 26% है। इसकी शोधन क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है।
तकनीकी खासियतें:
इस परियोजना का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) भारतीय रिफाइनरियों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। इसका मतलब है कि यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले भारी और निम्न-गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों में बदल सकती है। 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत इसके ज्यादातर भारी उपकरण देश में ही बने हैं, जबकि कुछ उन्नत सिस्टम अमेरिका, जापान और यूरोप से आयात किए गए हैं। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने वेल्डिंग और फिनिशिंग के काम की निगरानी की।
इनपुट: IANS



