रूसी सेना से 139 भारतीयों की वतन वापसी, विदेश मंत्रालय ने बाकी लोगों की रिहाई के प्रयास तेज किए
भारत सरकार रूसी सेना में सहायक भूमिकाओं में काम करने के लिए गए और बाद में कथित तौर पर युद्ध में भेज दिए गए अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समाचार एजेंसी…
भारत सरकार रूसी सेना में सहायक भूमिकाओं में काम करने के लिए गए और बाद में कथित तौर पर युद्ध में भेज दिए गए अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त करा लिया गया है।
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, "हम रूसी सेना में मौजूद बाकी भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारे प्रयासों से 139 भारतीय नागरिकों को रिहा कराया जा चुका है। रूसी सेना में बताए जा रहे बाकी करीब 24 भारतीयों की रिहाई के लिए भी हम लगातार कोशिश कर रहे हैं।"
जोखिम भरी नौकरियों के खिलाफ चेतावनी
इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के भ्रामक प्रस्तावों को लेकर आगाह किया है। प्रवक्ता ने कहा, "हम एक बार फिर लोगों को आगाह करना चाहते हैं कि वे ऐसे नौकरी के प्रस्तावों से सावधान रहें, जिनमें खतरा हो और जो बेईमान लोगों या संदिग्ध एजेंसियों की ओर से दिए जा रहे हों।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तब सामने आया जब ऐसी खबरें आईं कि रूस गए कई भारतीयों को यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में लड़ने के लिए भेजा जा रहा था। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने सितंबर 2025 में एक सख्त सलाह जारी कर भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने से बचने को कहा था। एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट में पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में फंसे दो भारतीय युवकों का भी जिक्र था, जिन्हें कंस्ट्रक्शन नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाया गया और फिर युद्ध की अग्रिम पंक्ति में भेज दिया गया। नवंबर 2024 में रूस द्वारा कब्जे में लिए गए सेलीडोव शहर से फोन पर उन्होंने दावा किया था कि उनके जैसे कम से कम 13 अन्य भारतीय भी वहां फंसे हुए हैं।
इनपुट: IANS



