कॉमनवेल्थ गेम्स में अंकुश पंघाल का 'गोल्डन पंच', पहले राउंड में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज़ अंकुश पंघाल ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। पुरुषों के 80 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के बॉक्सर को शिकस्त दी। पहले राउंड में…
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज़ अंकुश पंघाल ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। पुरुषों के 80 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के बॉक्सर को शिकस्त दी। पहले राउंड में 5-0 से पिछड़ने के बावजूद अंकुश ने जबरदस्त वापसी करते हुए यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसके बाद उनके गांव भेड़िया में जश्न का माहौल है।
समाचार एजेंसी IANS के साथ बातचीत में अंकुश ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है। मैं पहला राउंड 5-0 से हार गया था, इसलिए मुझ पर किसी तरह बाउट जीतने का बहुत प्रेशर था। लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था, और यह काम कर गया।" उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने परिवार से बात की है और सभी उनकी घर वापसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
कोच की रणनीति और कड़ी मेहनत
अंकुश के कोच प्रदीप सावंत ने इस जीत का श्रेय पूरी तैयारी और सही रणनीति को दिया। उन्होंने कहा, "अंकुश का गेम मुझे 11 साल पहले ही समझ आने लगा था। हमने पहले से प्लान कर लिया था कि कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड और कनाडा ही तुम्हें ज्यादा टफ कॉम्पिटिशन देंगे।" कोच ने बताया कि वर्ल्ड कप फाइनल में अंकुश इंग्लैंड से हार गए थे, लेकिन इस बार वे पूरी तरह तैयार थे। फाइनल से पहले उन्होंने अंकुश से घंटों बात की और रणनीति के तहत ही अंकुश ने पूरा गेम खेला, जिसका परिणाम देश के लिए एक और स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया।
कोच ने अंकुश की कड़ी मेहनत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अंकुश सुबह-शाम मिलाकर करीब पांच घंटे की ट्रेनिंग करते थे और हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देते थे।
पिता ने बताया सफलता का राज़
अंकुश के पिता, जो खुद कबड्डी के खिलाड़ी रह चुके हैं, ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा देसी खाना खिलाया और चाय तक नहीं पीने दी। उन्होंने कहा कि अंकुश की रुचि शुरुआत में कबड्डी में थी, लेकिन बाद में उन्होंने बॉक्सिंग को चुना। पूरा गांव अब अपने हीरो के स्वागत की तैयारी कर रहा है। अंकुश की आज ही भारत वापसी की फ्लाइट है।
इनपुट: IANS



